बतूता का जूता _ सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
बतूता का जूता
इब्नबतूता पहन के जूता
निकल पड़े तूफान में
थोड़ी हवा नाक में घुस गई
घुस गई थोड़ी कान में
कभी नाक को, कभी कान को
मलते इब्नबतूता
इसी बीच में निकल पड़ा
उनके पैरों का जूता
उड़ते उड़ते जूता उनका
जा पहुँचा जापान में
इब्नबतूता खड़े रह गये
मोची की दुकान में।
(ईब्ने बतुता=मशहूर त्वारीखी शख्सियत.दुनिया के बहुत बडे ईलाकोंका सफर किया त्वारीख.औए सफरनामोंका एक बड़ा मुसन्नीफ)

बहुत बढिया…..
By: राजीव तनेजा on May 26, 2008
at 2:25 am