लोग कहते हैं ख़ुदकुशी की है___गुलज़ार
जो शायर था चुप सा रहता था
बहकी-बहकी सी बातें करता था
आँखें कानों पे रख के सुनता था
गूँगी खामोशियों की आवाज़ें!
जमा करता था चाँद के साए
और गीली सी नूर की बूँदें
रूखे-रूखे से रात के पत्ते
ओक में भर के खरखराता था
वक़्त के इस घनेरे जंगल में
कच्चे-पक्के से लम्हे चुनता था
हाँ वही, वो अजीब सा शायर
रात को उठ के कोहनियों के बल
चाँद की ठोड़ी चूमा करता था
चाँद से गिर के मर गया है वो
लोग कहते हैं ख़ुदकुशी की है
jo harf-e-azan hai wo bayan ho nahi sakta,
qur’aan sa lehza to mera ho nahi sakta.
alfaz bhi lehza bhi tasadduq hai tumhara,
humse to talaffuz bhi ada ho nahi sakta…
By: sahil islam khan on June 12, 2009
at 3:24 pm
masha allah
By: sahil islam khan on June 12, 2009
at 3:25 pm
“POETRY IS THE MUSIC OF THOUGHT AND CONVEYED TO US IN THE MUSIC OF LANGUAGE.BASRI/SAMYEE/LAMSI PAIKAR KE SHAIR MUBARAKBAD.
KHURSHEED HAYAT
BILASPUR(C.G)
By: khursheedhayat on August 22, 2009
at 9:13 am