Posted by: Mohammedali’wafa’मोहम्म्दअली’वफा’મોહમ્મદઅલી’વફા’ مُحمَّد علی،وَفا، | March 19, 2009

लोग कहते हैं ख़ुदकुशी की है___गुलज़ार

लोग कहते हैं ख़ुदकुशी की है___गुलज़ार

 

जो शायर था चुप सा रहता था
बहकी-बहकी सी बातें करता था

आँखें कानों पे रख के सुनता था
गूँगी खामोशियों की आवाज़ें!
जमा करता था चाँद के साए
और गीली सी नूर की बूँदें
रूखे-रूखे से रात के पत्ते

ओक में भर के खरखराता था
वक़्त के इस घनेरे जंगल में

कच्चे-पक्के से लम्हे चुनता था
हाँ वही, वो अजीब सा शायर

रात को उठ के कोहनियों के बल
चाँद की ठोड़ी चूमा करता था

चाँद से गिर के मर गया है वो
लोग कहते हैं ख़ुदकुशी की है


Responses

  1. jo harf-e-azan hai wo bayan ho nahi sakta,
    qur’aan sa lehza to mera ho nahi sakta.
    alfaz bhi lehza bhi tasadduq hai tumhara,
    humse to talaffuz bhi ada ho nahi sakta…

  2. masha allah

  3. “POETRY IS THE MUSIC OF THOUGHT AND CONVEYED TO US IN THE MUSIC OF LANGUAGE.BASRI/SAMYEE/LAMSI PAIKAR KE SHAIR MUBARAKBAD.
    KHURSHEED HAYAT
    BILASPUR(C.G)


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