Posted by: Mohammedali’wafa’मोहम्म्दअली’वफा’મોહમ્મદઅલી’વફા’ مُحمَّد علی،وَفا، | June 7, 2009

शिकायत नहीं रही_अमृत घायल شِکایت نہِیں رہی ۔۔۔امرِت گھایل

शिकायत नहीं रही_अमृत घायल

 

यह जूठ है कि कोई शिकायत नहीं रही

सच ये है  उनसे कहनेकी जुर्रत नहीं रही

 

दिल चाहतहै उनको  लिखे खत तवील हम

पर क्या करे कि लिखनेकी ताकत नहीं रही

 

ए दोस्त मयकदे का करे क्या तवाफ हम

अब बेतहाशा पीने की आदत नहीं रही

 

वो दूर युं हुआ कि करीब और आ गया

जैसे कि दरमियानमें फुरकत नहीं रही

 

गुम हो गया हुं एस तरह उनके ख्याल में

उनसे भी अब मिलनेकी हसरत नहीं रही

 

मिलते तो हैं पर मिलते हैं युं बे दिली से दिल

जैसे किसी के दिलमें मुहब्बत नहीं रही

 


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