Posted by: Mohammedali’wafa’मोहम्म्दअली’वफा’મોહમ્મદઅલી’વફા’ مُحمَّد علی،وَفا، | June 18, 2009

प्रेम गीत—खलील जिब्रान

प्रेम गीत—खलील जिब्रान

 

एक दफा एक शायरने मोहब्बतका एक गीत लिखा..

बडा ही प्यार गीत.

उसने इस गीतके बहुतसे नुस्खे तैयार कराये.और उन्हें अपने दोस्तों और अपनी जान पहेचान वालोंको …मर्दोंको औरतोको भिजवाया और उस नौ खेज़  दोशीज़ह को भी भेज़ा.,जीसे आज तक वह सिर्फ एक ही बार मिला था.जो उंचे पहाडोंके दूसरे जानिब रहती थी.इस के कुछ दिन बाद उसने नौखेज़ दोशीज़ह का कासिद इसका खत ले कर शायरके पास आया.खतमें इसने लिखा था:

”में तुम्हे यकीन दिलाती हुं –मोहब्बतके इस गीतने जो तुमने मुझे लिख कर भेजा है.मुझे बे हद मुतास्सिर किया है. तुम अब मेरे यहां आओ, एक बार मेरे मां बाप से मिलो,और फिर हम यकीनन अपनी निसबतकी बात चीत पक्की कर लेने की कोई न कोई सुरत पयदा करही लेंगे.”

शायरने इस खतका जवाब उसे युं लिख भेजा.खातुन! ये तो सिर्फ मोहब्बतका एक गीत था.शायरके दिलकी निकली हुई बात.वो गीत जो हर मर्द औरत के लिये गाता है.इसके जवाबमें इस दोशीज़ह ने लिखा.

” मक्कार,फरेबी,= आज से अपनी मोत के दिन तक ,जब तक में जिन्दह हुं,सिर्फ तेरी वज़हसे किसी शायरको मुंह न लगाउंगी.में शायरों से हमेशा ही नफरत करती रहुं गी!”

 

 


Responses

  1. wah !kya baat hai… ab khula ki kis liye shayar hamesha parishan hal rahte hain.

  2. بہت خوب! کیا آپ اس بلوگ پر چھاپنے والی ہر پوسٹ کو اردو میں نہیں دے سکتے؟ اردو زبان کو اردو سکرپٹ میں پڑھنا بہتر لگتا ہے.

  3. Bhai Nishant the said post is posted in urdu too. pl.click the URL
    http://bagewafa.wordpress.com/2009/06/18/premgeet_khliljibran/


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