Posted by: Mohammedali’wafa’मोहम्म्दअली’वफा’મોહમ્મદઅલી’વફા’ مُحمَّد علی،وَفا، | June 25, 2009

एकट्रेस-शेखादम आबुवाला

एकट्रेस-शेखादम

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किताबोंमें छिपे बैठे हैं जो किरदार

उनकी झिन्दगी जीनेसे क्या मतलब

ये आंसु कैसे आंसु है

जो अपने हो नहीं सकते

पराई नींदके सपने भी अपने हो नहीं सकते

किसी खुद्दार के लबकी किसी बीमार के लबकी

तेरे होठों पे होतीहै खूशी अगियार के लबकी

तेरी आहोंमें ठंडक है

मगर गर्मीसे आरी है

तेरा हर बोल युं देखे तो

अंगारोपे भारी है

तेरे गमझे तेरे अंदाझ क्या कहिये

कभी मीठी कभी तल्ख तेरी आवाझ क्या कहिये

तेरे अवकात नकली है

तेरे लम्हात नकली है

तेरा चहेरा तो अस्ली है

मगर जझबात नकली है

किताबोंमें छिपे बैठें है किरदार

उनकी जिन्दगी जीनेसे क्या मतलब


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