प्रार्थना_प्रोफ़ेसर देवेन्द्र मिश्र
आतंक के अन्धेरों से हमें शांति के उजालों की ओर ले चलो
असत्य रुपी आन्धियों से सत्य की बयारों की ओर ले चलो
जग मे सारे हों सुखी हम कामना ऐसी करें
विश्व में हों मित्र सारे कर्म कुछ ऐसे करें
सर्व मंगल मांगल्ये सिर्फ़ ऐसी भावना की ओर ले चलो
आतंक के अन्धेरों से……………………………॥
स्वार्थ हीन विचार पनपें प्रगति पथ विस्तार हो
आदर्श मानवता रहे सर्व धर्म प्रिय व्यवहार हो
त्याग कर दुर्भाव सारे प्रेम करुणा की डगर की ओर ले चलो
आतंक के अन्धेरों से……………………………॥