Posted by: Bagewafa | فروری 28, 2008

झुग्गी है कीसी कैस की_मोहम्मदअली वफा مسجد کو جو توڑ کر پہونچے تھے تخت پر۔۔۔۔محمدعلی وفا

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مسجد کو جو توڑ کر پہونچے تھے تخت پر۔۔۔۔محمدعلی وفا

Tod do

झुग्गी है कीसी कैस की_मोहम्मदअली वफा

नाजुक सा पायाहै गला उस्को भी मोड दो
ये हड्डीयां ईनसानकी जीस्मों से तोड दो.

मंझीलें सब मिल जायगी जंगल बयांबानकी
वहशी नगरमें जाकर ताअल्लुक को जोड दो.

बह जाये पानी आंख से ये कोइ मजाल है,?
दिलकी गहराईमें घुसो और आंखें फोड दो.

मस्जिद को जो तोड कर पहोंचे थे तख्त पर,
गर जाना है वापस वहां ,मंदिर भी तोड दो.

हाथमें पथ्थर लिये फिरते हो क्यों वफा ?    
झुग्गी है कीसी कैस की उसको तो छोड दो.

jughghi-hai-kisi-kaiski.jpg

24 फेब्रु.2008

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Responses

  1. hi friend
    nice hindi blog


زمرے

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