Posted by: Bagewafa | مارچ 11, 2010

धुंधली तस्वीरें—सरोज सागर

धुंधली तस्वीरें—सरोज सागर

उजली पोशाकों में

खुद को छिपाये

फिरते यहां

काली रातों के साये

मितते भी लोग

मिटाते भी लोग

तोहमत वहां हम

किस पर लगाएं

सूनी दीवारें है

दिल के मकान की

धुंधली तस्वीरोंसे

कैसे सजाएं,

होंठों से निकले भी

न थे सवाल अभी

कितने जवाबों ने

द्वार खटखटाए

 

 

 

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