Posted by: Bagewafa | مارچ 11, 2010

पंछी कहा डेरा बनाये_मुहम्मदअली वफा

पंछी कहा डेरा बनाये_मुहम्मदअली वफा 

   

अब उम्मीद है कि फिर से पौदो मे जान आये

धरती हरी हो जाये कलियां  खिल जाये

दरख्त तहनिया अंगडाई लेने लगे

पत्तोके लिबास से वृक्ष लहराये

रग जीवनमे नये आये

पंखी खूशिया मनाये

सूरज धूपकी खैरात करे

सर्दी से सब नजात पाये

मगर किसने जलाया है लावा

कौन आग की बरसात बरसा रहा है

बरफ तो पीघलेगा मगर घर भी जलेगे

वृक्ष खुद भष्म होजाये

पंछी कहां डेरा बनाये


११मार्च२०१०

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