Posted by: Bagewafa | اگست 1, 2010

رُکنا محال کر دیا۔۔۔پروین شاکر रुकना महाल कर दिया-परवीन शाकिर

رُکنا محال کر دیا۔۔۔پروین شاکر 

रुकना महाल कर दिया-परवीन शाकिर

 

चलनेका होंसला नहि, रुकना महाल कर दिया

इशक इस सफरने तो मुझको निढाल कर दिया

 

ए मेरी गुल ज़मीं तुझे चाहथी एक किताब की

अहले किताबने मगर कया तेरा हाल कर दिया

 

मिलते हुए दिलों के बीच और था फैसला कोई

इसने मगर बिछडते वक्त और सवाल कर दिया

 

अब के हवा के साथ है दामने यार मुन्तज़ीर

बानुए शबके हाथ में रखना संभाल कर दिया

 

मुमकिना फेंसलों में एक हिज्रका फेंसलाभी था

हमने तो एक बात की,इसने कमाल कर दिया

 

मेरे लबों पे महर थी,पर शीशए रु ने तो

शहर के शहर को मेरा वाकिफे हाल कर दिया

 

चहेरा व नाम एक साथ आज न याद आ सके

वक्त ने किस शबी को ख्वाबो ख्याल कर दिया

 

मुद्दतों बाद इसने आज मुझसे कोई गिला किया

मंसबे दिलबरी ये क्या मुझ को बहाल कर दिया

 

Click to listen Parvin Shakir the following URL:

 http://www.youtube.com/watch?v=QUGJror9sx0&feature=related

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