Posted by: Bagewafa | اگست 9, 2010

غدّاری کی۔۔۔مصطفٰی زیدی गद्दारी की-मुस्तफा ज़ैदी

غدّاری کی۔۔۔مصطفٰی زیدی  

  

 

गद्दारी की-मुस्तफा ज़ैदी 

 

तुमने हर दौर में हर नस्ल से गद्दारी की

तुमने बाज़ारोंमें अक्लोंली खरीदारी की

 

ईंट से ईंट बजा दी गई खुद्दारी की

खौफ को रख लिया खिदमत पे कमांदारी की

 

आज तुम मुझसे मेरी जिंसे गिरां मांगते हो

हलफे जहन व वफादारी ए जां मांगते हो

  


زمرے

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