Posted by: Bagewafa | مئی 2, 2011

भूक है साहब-मुहम्मदअली वफा

भूक है साहब-मुहम्मदअली वफा

 नीकला मनसे भूत है साहब.

मान लो सब ये झूट है साहब.

 

पेट ये खाली कीस से भरते

खेतमें ऊगी भूक है साहब.

 

  बंदरबांट सजा है  प्यारे

ये अनोखी  लूंट है साहब

 

अंध की लाठी क्या भई बनते

पूत भी सारे कपूत है साहब

 और पीते क्या ईस मकतलमें

खून के ये कुछ घूंट है साहब

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