Posted by: Bagewafa | مئی 11, 2011

सुरत बदलनी चाहिए—मुअहम्मदअली वफा

सुरत बदलनी चाहिए—मुअहम्मदअली वफा

ये ज़ालिमोकी घर जलाना मेरा मक्सद नहीं

खून बेगुनाहोंका  बहाना मेरा मकसद नहीं

 

इन्साफ के कठहरोंमें मुजरीम को खडा करदो 

 सिर्फ हंगामा,खडा कराना मेरा मकसद नही

 

हालात के मारोंकी  हालत  सवंरनी चाहिये

जिसने बहाया खून  उसे शूली मिलनी चाहिये

 

कब तक छूपाओगे तुम कातिल सितमगरको

सारी कोशिश है की, सुरत बदलनी चाहिए

  

 अब तो सितमगरकी साजिशें खुलनी चाहिए

सच के लावा की  वफा अब आग लगनी चाहिए

 मेरे सीनेमें नही तो,अब तेरे सीनेमें सही

हो कहीं भी  लेकीन, एक आग जलनी चाहीए”

  

(श्री दुष्यंत कुमारके एक मुकतककी तझमीन. दुष्यंत कुमार के मिस्रे को लाल रग से छापा गया है)

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