Posted by: Bagewafa | دسمبر 7, 2011

पत्थर नहीं मीला_मुहम्मदअली वफा

पत्थर नहीं मीला_मुहम्मदअली वफा

 

सर तो मेरा मोज़ुद था पत्थर नहीं मीला,
जालिमको बयाबानमें खंजर नहीं मीला.

मजबूर को सब रास्ते जंगलमें ले गये
मैज़िल तलक जानेको रहबर नही मीला.

कांटो की फसल काटने में लग गये आकिल,
गुलशनमें, उनको फूलका घर नहीं मीला.

झांखा कभी हमने तुम्हारी नीली आंखमें,
नफरत मीली प्यारका सागर नहीं मीला

साकी अब तो ठीक है बंध हो ये मै खाने,
तिशना लबी थी कोई चारागर नही मीला.

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Responses

  1. झांखा कभी हमने तुम्हारी नीली आंखमें,
    नफरत मीली प्यारका सागर नहीं मीला वाह बहोत खूब..वफा साहेब
    सपना

  2. कांटो की फसल काटने में लग गये आकिल, गुलशनमें, उनको फूलका घर नहीं मीला
    बहोत खूब..वफा साहेब
    sajid


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