Posted by: Bagewafa | دسمبر 15, 2011

ڈھُونڈھ کر لاؤ —مُحمّدعلی وفا ढूंढ कर लाओ—मुहम्मदअली वफा

ڈھُونڈھ کر لاؤ —مُحمّدعلی وفا

 

رہے تابِندا یے زندگی ہنر کو ڈھونڈھ کر لاؤ 

 گُزری ہوئ وہ شام و سحر کو ڈھونڈھ کرلاؤ 

 

کہاں ٹھہرا ہُوا ہے گُم شُدہ  وقت کا پانی 

 ڈگر وہ ڈھونڈھ کر لاءو نہر کو ڈھونڈھ کر لاؤ  

 

حقیقت ہَےجو  پردے میں اُسے بھی دیکھ لے دُنِیاں 

 کوئ اہل نظر آوُ، نظر کو ڈھونڈھ کرلاؤ 

 

گِری تھی جب یے بیدرْدی سے  ہمارے خرمن پر 

جلایا تھا جیسے تنے شجر کو ڈھونڈھ کرلاؤ 

 

کبھی ہم بھی تھے اُنکی نگاہوں میں پوشیدہ 

وفا جاؤ کہیں سے وو خبر کو ڈھونڈھ رلاؤ

 

ढूंढ कर लाओ—मुहम्मदअली वफा

 

रहे ताबिंदा ये जिंदगी, हुनर को ढूंढ कर लाओ.
गुजरी हुई वो शामो सहर को ढूंढ कर लाओ.

 

कहां ठहरा हुआ है गुम शुदा वो वक्तका पानी,
डगर वो ढूंढ कर लाओ नहर को ढूंढ कर लाओ.

 

हकीकत जो है परदेमें उसे भी देख ले दुनियां
कोई अहले नज़र आओ, नज़र को ढूंढ कर लाओ.

 

गिरी थी जब बेदर्दी से ये हमारे खिरमन पर
जलाया था जीसे तुने शजर को ढूंढ कर लाओ.

 

कभी हमभी थे उनकी निगाहों में पोशीदा
वफा जाओ कहीं से वो खबर को ढूंढ कर लाओ.

 

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زمرے

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