Posted by: Bagewafa | دسمبر 25, 2011

राहुल मुखालिफ मोर्चे का मोहरा बने अन्ना/हिसाम सिद्दीकी

 

 

राहुल मुखालिफ मोर्चे का मोहरा बने अन्ना/हिसाम सिद्दीकी

लोकपाल बिल के बहाने अन्ना के दिल की बात जुबान पर आ ही गई, राहुल के खिलाफ साजिश बेनकाब
Dec 18 to 24, 2011


नई दिल्ली! अन्ना हजारे ने जनलोकपाल के बहाने कांग्रेस को निशाना बना कर नफरत फैलाने की जो मुहिम शुरू की थी उसका अस्ल मकसद राहुल गांद्दी को बदनाम करना और उन्हें मुल्क का वजीर-ए-आजम बनने से रोकना है। चूंकि अन्ना बहुत ही छोटे किस्म के शख्स है इसलिए वह इस साजिश को लम्बी मुद्दत तक पोशीदा नहीं रख सके और अचानक राहुल के खिलाफ बयानबाजी पर उतर आए। अपने गांव रालेगढ़ सिद्धी में उन्होंने कहा कि लोकपाल बिल पर गौर करने वाली पार्लियामेंट की स्टैण्डिंग कमेटी ने राहुल के दबाव में अपनी राय तब्दील की होगी क्योंकि दूसरा कोई इस हैसियत का है ही नहीं। ग्यारह दिसम्बर को दिल्ली पहुंच कर उन्होंने जंतर मंतर पर एक दिन का द्दरना दिया तो उसमे ंबोले कि राहुल जिस जेहन के शख्स है ऐसे शख्स को अगर मुल्क का वजीर-ए-आजम बना दिया गया तो मुल्क खतरे में पड़ जाएगा। उनके बयानात और ग्यारह दिसम्बर को उनके डायस पर एक नजर डालने से बिल्कुल वही नजारा दिखा जो सन् उन्नीस सौ अट्ठासी में विश्वनाथ प्रताप सिंह का था। वीपी सिंह उस वक्त राजीव गांद्दी के खिलाफ साजिश का मोहरा बन गए थे उनके इर्द गिर्द भी लेफ्ट पार्टियों और आरएसएस के लोगों का जमावड़ा रहता था अब अन्ना के इर्द गिर्द लेफ्ट राईट सभी हैं और अन्ना के निशाने पर राहुल गांद्दी हैं। अगर यह साजिश नहीं है तो अन्ना ने यह अंदाजा कैसे लगा लिया कि पार्लियामेंट की स्टैण्डिंग कमेटी, जिसमें सभी पार्टियों के मिलाकर तीस मेम्बरान शामिल है उस कमेटी ने राहुल के दबाव में अपना फैसला तब्दील किया। अन्ना के पास राहुल गांद्दी का जेहन नापने का कौन सा पैमाना है जिसके जरिए उन्होंने उनका जेहन नाप कर कह दिया कि ऐसे जेहन का मालिक अगर मुल्क का वजीर-ए-आजम बन गया तो मुल्क के लिए बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा। उसी डायस पर खुद को हिन्दी का कवि बताने वाला कोई कुमार विश्वास राहुल गांद्दी को ‘‘तोता’’ बता रहा था।

अन्ना का आन्दोलन जब शुरू हुआ था तभी से कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी दिग्विजय सिंह बार-बार कहते आए हैं कि अन्ना राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। जब-जब दिग्विजय सिंह ने लोगों को अन्ना की हकीकत बताने की कोशिश की अन्ना ने कभी भी उनकी बात का जवाब देने के बजाए ‘‘पागल खाने भेज कर उनका इलाज कराया जाना चाहिए’’ जैसे बेहूदा जुमले बोलकर बात टालने की कोशिश की। लेकिन अन्ना ज्यादा दिनों तक अपने छुपे हुए एजेंडे को छुपाए नहीं रख सके और वह हकीकत उनकी जुबान पर आ ही गई जिसके लिए वह सालों से काम कर रहे थे।

उन सियासतदानों पर भी हैरत होती है जो ग्यारह दिसम्बर को जंतर-मंतर पर अन्ना के साथ बैठे रहे और अन्ना के साथी उलूल जुलूल बातें करते रहे, मसलन लोकपाल का सेलेक्शन कैसे हो इस पर बोलते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार की जो तजवीज (प्रस्ताव) है उसके मुताबिक लोकपाल का सेलेक्शन करने वाली टीम में तीन सियासतदां होंगे, यह बात हमें मंजूर नहीं है क्योंकि सियासतदानों पर कोई भरोसा नहीं रह गया है। उन्होंने आगे कहा कि वजीर-ए-आजम और लीडर आफ अपोजीशन मिलकर लोकपाल का इंतखाब करें यह बात भी हम मंजूर नहीं करेंगे क्योंकि प्राइम मिनिस्टर और लीडर आफ अपोजीशन भी मिलकर बेईमानी कर सकते हैं। उनका मकसद साफ था कि मुल्क का एक भी सियासतदां ईमानदार नहीं है क्योकि मुल्क की सारी ईमानदारी अन्ना और उनके चार पांच साथियों की इजारादारी बन गई है। उनकी इस तरह की ऊटपटांग बातों को अरूण जेटली मुजरिमाना खामोशी के साथ सुनते रहे, बल्कि खामोश रहकर उन्होंने केजरीवाल के इस बयान पर मोहर लगा दी कि हां मुल्क के तमाम सियासतदां बेईमान हैं।

खुद अन्ना और उनके तमाम साथी अवाम को गुमराह करने के लिए स्टैडिंग कमेटी की सिफारिशात को इस तरह पेश करते रहे जैसे बिल को आखिरी शक्ल दे दी गई हो। हालांकि उन्हें पता था कि स्टैडिंग कमेटी की सिफारिशात पर कैबिनेट गौर करेगी उसके बाद ही नया बिल बनेगा। लेकिन झूटों के बादशाह अन्ना हजारे और बेईमानी से पैसा कमाने में पीएचडी कर चुकी किरन बेदी बार-बार स्टैडिंग कमेटी की सिफारिशात को बिल बताकर अपनी काबलियत का मजाहिरा कर रही थीं।

सीपीएम की वृंदा करात ने कई बार यह सवाल उठाया कि अन्ना की टीम एनजीओ और कारपोरेट घरानों को भी लोकपाल के दायरे में लाने की बात करे। उन्होंने कहा कि मुल्क में बेईमानी बहुत जमाने से है लेकिन हजारों करोड़ की बेईमानियां 1991 के बाद से ही शुरू हुई है। कारपोरेट घरानों ने सैकड़ो की रिश्वत को करोड़ो तक पहुंचा दिया, बड़े कारपोरेट घराने माइनिंग के नाम पर पूरे देश का बेशकीमती खजाना लूट रहे हैं और कोई इनके खिलाफ आवाज नहीं उठाता उनके इस मतालबे को अन्ना हजारे, अरविंद केजरीवाल और किरन बेदी वगैरह इस अंदाज में टाल गए जैसे उन्होंने कुछ सुना ही ना हो। एक बार भी अन्ना या उनके किसी साथी ने वृंदा करात की बात का नोटिस नहीं लिया।

एनजीओ और बड़े कारपोरेट घरानों को लोकपाल के दायरे में लाने की बात अन्ना और उनके साथी सुने भी कैसे उन्हीं के लिए तो यह पूरी टीम काम कर रही है। अन्ना की टीम में शामिल कई लोगों को एनजीओ के जरिए अमरीका से करोड़ो रूपया मिल रहा है। और वह इसी काम के लिए मिल रहा है कि यह लोग मुल्क के सियासतदानों की साख अवाम में खराब करें, अफरा तफरी का माहौल पैदा करें ताकि मुल्क की बागडोर ऐसे लोगों के हाथ में चली जाए जो इस मुल्क को अमरीका के हाथों गिरवी रख सकें।

अन्ना और उनकी टीम के झूट की इंतहा यह है कि अब अन्ना ने सीद्दे तौर पर राहुल गांद्दी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और खुद ही पार्टी बन गए। यह भी एलान कर दिया कि अगले साल पांच रियासतों में होने वाले असम्बली एलक्शन के दौरान वह कांग्रेस के खिलाफ मुहिम चलाएंगे तो एक सियासी पार्टी होने के नाते कांग्रे्रस के कई लीडरान ने उनको उन्हीं की जबान में जवाब दिया। मरकजी वजीर बेनी वर्मा ने कहा कि अन्ना तो आरएसएस के एजेंट बन चुके हैं। उत्तर प्रदेश में उन्हें आने दीजिए हम उन्हें देख लेंगे। बेनी वर्मा का मतलब एलक्शन मुहिम से था लेकिन अन्ना के एक प्यादे कुमार विश्वास ने मीडिया के सामने बेनी के बयान को ऐसे तोड़-मरोड़ के पेश किया जैसी बेनी ने उनके साथ कोई मारपीट करने की बात कही हो और कहा कि वह खुद केजरीवाल, सिसौदिया, उत्तर प्रदेश में ही रहते हैं बेनी जब चाहे देख लें।

अन्ना और उनके तमाम साथी हफ्तों से इस किस्म की भड़काऊ बातें कर रहे हैं कि कोई उनकी पिटाई कर दे या दो चार थप्पड़ मार दे ताकि वह बाद में उस मुद्दे पर शोर मचा सकें। कांग्रेस लीडर सत्यव्रत चतुर्वेदी से जब एलेक्ट्रानिक मीडिया के नुमाइंदों ने अन्ना के ग्यारह दिसम्बर के अनशन के बारे में सवाल किया तो चतुर्वेदी ने ठीक ही जवाब दिया कि इस देश में सारे लोग बेईमान है, झूटे हैं बस अन्ना और उनके चार-पांच साथी ही हरिश्चन्द्र की औलाद है। इसलिए उनके सिलसिले में क्या बोलें?

(Jaded markaz: Dec 18 to 24, 2011 )

 

http://www.jadeedmarkaz.net/special_report_hindi.htm

 

संघ से जुड़े हैं अन्ना!

Click pl.

http://www.samaylive.com/nation-news-in-hindi/137042/anna-bjp-rashtriya-swayam-sewak-sangh-.html

 

 

 

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زمرے

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