Posted by: Bagewafa | دسمبر 26, 2011

बड़ी दौलत है —अमजद हैदराबादी

बड़ी दौलत है —अमजद हैदराबादी

 

हर चीज़ का खोना भी बड़ी दौलत है।
बेफ़िकरी से सोना भी बड़ी दौलत है॥

इफ़लास ने सख़्त-मौत आसाँ कर दी।
दौलत का न होना भी बड़ी दौलत है॥

साँचे में अजल के हर घडी़ ढलती है।
हर वक़्त यह शमए-ज़िन्दगी जलती है॥

आती-जाती है साँस अन्दर-बाहर।
या उम्र के हलक़ पर छुरी चलती है॥

हासिल न किया महर से ज़र्रा तुमने।
दरिया से पिया न एक क़तरा तुमने॥

‘अमजद’ साहब! ख़ुदा को क्या समझोगे?
अब तक ख़ुद ही को जब न समझा तुमने॥

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