Posted by: Bagewafa | جنوری 6, 2012

चारु चन्द्र ने हिम की चादर- गोपाल बघेल मधु(टोरोंटो कनाडा)

चारु चन्द्र ने हिम की चादर- गोपाल बघेल मधु(टोरोंटो कनाडा)

(मधु गीति सं॰ २१६४, दि॰ ३० दिसम्वर २०११)

 चारु चन्द्र ने हिम की चादर, फैलादी है जल थल पर;
 स्मित धरा सिहर आयी उर, धवल भाव उूर्ध्वित होकर.
 
 हिम कण वायु में बहके हैं, रश्मि लिये अद्भुत चमके हैं;
 पद तल जो अवनी सोहे हैं, द्युति हृद की दे मन मोहे है.
 कोमल हिम चादर पर पग रख, मन को ठेस कभी लगती है;
 अवनी तल की अद्भुत शोभा, चरण तले रोंधी लगती है.
 
 चरण चिन्ह जो मैंने छोङे, पृथ्वी तल पर हिम ने जोङे;
 तान रहे वे जग में छोङे, आने वालों का मन जोङे.
 लौटूँगा तब क्या पाउूँगा, भूतल पर सुषमा खोजूंगा;
 हिम की ‘मधु’ व्यापक छाती पर, शायद पर्त पङी हो उपर.

Advertisements

زمرے

%d bloggers like this: