Posted by: Bagewafa | جنوری 13, 2012

राहुल को नौजवानों,मुलायम को मुसलमानों,बीजेपी को बेईमानों का सहारा–हिसाम सिद्दीकी

उत्तर प्रदेश असम्बली एलक्शन में चैकोना मुकाबला। मुख्तलिफ पार्टियों को मुख्तलिफ तबकों के वोटों की उम्मीद

राहुल को नौजवानों,मुलायम को मुसलमानों
बीजेपी को बेईमानों का सहारा—-हिसाम सिद्दीकी

लखनऊ! उत्तर प्रदेश असम्बली के एलक्शन शुरू होते ही रियासत के इंतेखाबी मैदान में उतरी चारो सियासी जमाअतो यानी कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने मुख्तलिफ तबकों के वोटो को अपनी जानिब खींचने की कोशिशें तेज कर दी है। किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेेंगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इन पार्टियों के लीडरान ने जिस अंदाज में अपनी इंतेखाबी मुहिम छेड़ी है उससे साफ जाहिर है कि कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी राहुल गांद्दी का फोकस रियासत के नौजवानों पर है। समाजवादी पार्टी का फोकस यादवों के बाद मुसलमानों पर है। भारतीय जनता पार्टी ने बेईमानों और हिश्ट्रीशीटर्स के सहारे तो मायावती की बहुजन समाज पार्टी को मायावती की बिरादरी के दलित वोटर्स का ही सहारा है। मायावती की बिरादरी के वोट प्रदेश में तकरीबन ग्यारह फीसद ही हैं। कोई देा महीने पहले तक ऐसा लगता था कि अस्ल मुकाबला मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाज पार्टी के दरम्यान रहेगा, लेकिन राहुल गांद्दी की एग्रेसिव इंतखाबी मुहिम, राष्ट्रीय लोक दल के साथ सियासी समझौते और पुराने समाजवादी रशीद मसूद, सीनियर कांग्रेस लीडर लखीमपुर से लोकसभा मेम्बर जफर अली नकवी और मरकजी वजीर कानून सलमान खुर्शीद की सरगर्मियों की वजह से अब अस्ल मुकाबला समाजवादी और कांग्रेस के दरम्यान दिखने लगा है। बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी में तीसरे व चैथे नम्बर के लिए मुकाबले के आसार बन गए हैं। पीस पार्टी आफ इंडिया के लिए कहा जाता था कि वह मुस्लिम वोट खराब करा सकती है। अब ऐसी भी तवक्को (संभावना) नहीं है। भारतीय जनता पार्टी ने बाबू सिंह कुशवाहा, बादशाह सिंह, दद्दन मिश्रा और अवद्देश कुमार वर्मा जैसो को लेकर बता दिया कि राम नाम का नारा तो चल नहीं पा रहा है इस लिए बेईमानों और बेईमानी के सहारे ही इंतखाबी मैदान में उतरा जाए। कत्ल के इल्जाम में जौनपुर जेल में बंद बीएसपी के हिश्ट्रीशीटर लोकसभा मेम्बर द्दनन्जय सिंह की बीवी को भी बीजेपी रारी असम्बली हल्के से उतारने की तैयारी में है।

वजाहिर इस वक्त सबसे ज्यादा कमजोर मायावती की बहुजन समाजवादी पार्टी है। पिछले एलक्शन में बीएसपी को असम्बली में मुकम्मल अक्सरियत हासिल हुई थी, लेकिन मायावती उसे संभाल नहीं सकी, दूसरी पार्टियों से लाकर उन्होंने जिन बड़ी तादाद में हिश्ट्रीशीटरों और जरायम पेशा अनासिर को असम्बली एलक्शन जितवाया था फिर वजीर और चेयरमैन बनाया था, उनमें से बेश्तर (अद्दिकांश) ऐसे थे जो अपनी हरकतों से बाज नहीं आए। अब एलक्शन सर पर आ जाने पर उन लोगों ने दूसरी पार्टियों में अपने ठिकाने तलाश करने शुरू कर दिए तो भगदड़ से घबराई मायावती ने उनके टिकट काटना शुरू कर दिए। खबर लिखे जाने तक मायावती तकरीबन दो दर्जन वजीरों और चेयरमैनों को बर्खास्त कर चुकी है उनके टिकट काट चुकी हैं और टिकट काटने का सिलसिला अभी जारी है।

एक इत्तेला के मुताबिक मायावती अपने आद्दे से ज्यादा यानि तकरीबन सवा सौ मेम्बरान असम्बली के टिकट काट चुकी है और तीन दर्जन से ज्यादा मेम्बरान के हलके तब्दील कर चुकी है। मतलब यह कि मायावती अपने तकरीबन तीन चैथाई मेम्बरान असम्बली के टिकट या तो काट चुकी है या तब्दील कर चुकी है। पुराने लोगों के टिकट काटकर जिन नए लोगों को पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया है उनके लिए सबसे बड़ा दर्दे सर वही लोग है जिनके टिकट कटे हैं या तब्दील हुए है। मायावती और उनके करीबी साथियों का यह ख्याल है कि अगर मौजूदा मेम्बरान असम्बली के टिकट काटकर नए लोगों को टिकट दे दिया जाएगा तो वह आसानी से एलक्शन जीत लेंगे। हालांकि हकीकत यह है कि अवाम में नाराजगी मायावती हुकूमत से है ना कि मेम्बरान असम्बली से। सभी को अच्छी तरह मालूम है कि इस हुकूमत में मेम्बरान असम्बली की कोई औकात ही नहीं रही। इस सूरतेहाल में मायावती इस एलक्शन में क्या कर सकेगी, यह एक बड़ा सवाल है। कांग्रेस पार्टी वैसे तो बुरी तरह से ग्रुपबाजी का शिकार है। उत्तर प्रदेश में इस वक्त रियासती सदर रीता बहुगुणा जोशी, प्रमोद तिवारी, बेनी प्रसाद वर्मा, जगदम्बिका पाल और सलमान खुर्शीद सबके अलग-अलग गु्रप है। इसके बावजूद जबसे राहुल गांद्दी ने उत्तर प्रदेश की बागडोर अपने हाथ में ली है। इन लोगों की गु्रपबाजी पीछे हो गई है। राहुल गांद्दी ने बहुत ही ‘एग्रेसिव’ तरीके से इंतखाबी मुहिम शुरू की है। आम लोगों का रूजहान कांग्रेस की तरफ बहुत तेजी से बढ़ रहा है। राहुल गांद्दी आम तौर पर नौजवानों को फोकस करके तकरीर करते हैं। जात-पात और बिरादरी वाद को निशाना बनाते हैं। नौजवानों से एक ही बात करते रहते हैं कि वह जात-पात और बिरादरी वाद के जहर से बाहर निकलकर अपने और प्रदेश के मुस्तकबिल के बारे में फिक्र करे। आम नौजवानों पर उनकी बात का असर भी दिख रहा है शायद इसीलिए उनकी हर रैली और पब्लिक मीटिंग में भीड़ में इजाफा ही होता जा रहा है। राहुल गांद्दी मायावती हुकूमत की बेईमानियों, समाजवादी पार्टी की जात-पात की सियासत और बीजेपी की फिरकावाराना सियासत पर सख्त हमले करते है। जिसका असर नौजवानों पर दिखाई दे ता है बीजेपी के लिए वह कहते हैं कि ‘‘वह तो अब वेंटीलेटर पर है उसे मसनूई (कृत्रिम) सांसे दी जा रही है जिस दिन वेंटीलेटर हट गया उसी दिन बीजेपी की सियासी मौत हो जाएगी।’’ मायावती हुकूमत की बेईमानियों पर भी उनके हमले काफी सख्त होते हैं जो आम लोगों के दिलों तक उतर जाते हैं क्योंकि अभी तक इतनी सफाई और सख्ती के साथ कोई सियासतदां मायावती पर हमला नहीं कर रहा था।

अगर भीड़ को पैमाना मान लिया जाए तो समाजवादी पार्टी भी काफी आगे निकल चुकी है। मुलायम सिंह यादव तो अभी तक एक-दो ही पब्लिक मीटिंग कर सके हैं लेकिन उनके सियासी जानशीन बेटे अखिलेश यादव अपने क्रांति रथ पर सवार होकर पूरे प्रदेश का मुसलसल दौरा कर रहे हैं। अखिलेश को सुनने के लिए जितनी भीड़ आ रही है उतनी भीड़ तो मुलायम सिंह यादव की मीटिंगों मंे भी नहीं आती। यह भीड़ देखकर ही मुलायम सिंह यादव और उनकी पूरी पार्टी के हौसले बुलंद है। उन्हें अब यकीन हो चुका है कि इस एलक्शन में समाजवादी पार्टी अपने अकेले दम पर ही मुकम्मल अक्सरियत हासिल करके उत्तर प्रदेश की बागडोर संभाल लेगी। इसीलिए मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव दोनों ही तकरीबन रोज यह बात दोहराते हैं कि अब उन्हें सरकार बनाने से कोई नहीं रोक सकता। मुस्लिम रिजर्वेशन, बुनकरों की कर्जा माफी जैसे फैसलों और राहुल गांद्दी की एग्रेसिव इंतखाबी मुहिम की वजह से बड़ी तादाद में मुसलमानों का झुकाव कांग्रेस की तरफ हुआ है। लेकिन यह भी एक हकीकत है कि अभी भी उत्तर प्रदेश के मुसलमानों की अक्सरियत मुलायम सिंह यादव के साथ ही दिखती है। फिरकापरस्त ताकतों ने पीस पार्टी की तारीफें कर करके मुसलमानों पर असर डालने की कोशिशें जरूर की लेकिन पीस पार्टी कुछ कर नहीं पा रही है। इस पूरे चुनावी दंगल में सबसे खराब हालत बीजेपी की है। एलक्शन मुहिम में बीजेपी पहले से ही पीछे तो थी ही बेईमानी के इल्जाम में बीएसपी से निकाले गए बाबू सिंह कुशवाहा समेत कोई एक दर्जन बदनाम लोगों को पार्टी में शामिल करके बीजेपी ने यह मैसेज दे दिया कि अब चूंकि उत्तर प्रदेश में राम के नाम पर आम हिन्दू बीजेपी को वोट देने के लिए तैयार नहीं है इसलिए बीजेपी बेईमानों के सहारे एलक्शन जीतने की कोशिश में लग गई है। पार्टी के एक गु्रप के इस कदम से पूरी बीजेपी बैकफुट पर तो आ ही गई अवाम में भी बीजेपी का चेहरा बहुत खराब हुआ। पार्टी के बड़े लीडर तो किसी को मिलते नहीं छोटे लीडरों का भी घर से निकलना मुश्किल हो रहा है क्योंकि वह जहां जाते हैं आम लोग एक ही सवाल करते हैं कि आखिर बाबू सिंह कुशवाहा और बादशाह सिंह जैसों को पार्टी में क्यों शामिल किया गया। इसका उनके पास कोई जवाब नहीं होता है। आम वोटरों में भी बीजेपी के इस कदम की सख्त मजम्मत (निंदा) हो रही है। विनय कटियार और बीजेपी के रियासती सदर सूर्य प्रताप शाही जैसे लोग जिन्होंने बाबू सिंह कुशवाहा को पार्टी में दाखिल कराया सिर्फ हटद्दर्मी का मजाहिरा कर रहे हैं। जवाब उनके पास भी नहीं है।

(सौजन्य:जदीद मरकज़)


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