Posted by: Bagewafa | فروری 12, 2012

शेखादम आबुवालाकी उर्दू शायरी—-मुहम्मदअली वफा

शेखादम आबुवालाकी उर्दू शायरी—-मुहम्मदअली वफा

मैंने पकडातो है तेरा दामन

जान निकलेगी अब मेरे तनसे

एक टूकडा है मेरे कफन का

मेरे हाथोमें दामन नहीं है

 *   *     *   *

 कोई आये न आये हमें क्या

 आज आदम उठाना है डेरा

हम भटकते मुसाफिर जा ठहरे

अपन कोई नशेमन नहीं है

*   *     *   *

सिलसिला फितरतका तोडा है न तोडा जायेगा

मौतके कदमोंपे भी तुम जिन्दगी बनके रहो

*   *     *   *

रिश्ते न कभी ये टूटेंगे

सायें है न तन से छूटेंगे

दीवाने चले तो साथ उनके

वीराने भी गुलशन तक पहुंचे

*   *     *   *

पहली नजरका प्यार

तो पहेलाही प्यार है

फीर ईस तरह मरेंगे

 हमें कूछ पता नहीं

 *   *     *   *

मौत मन्झिलकी दास्तां होगी

जिन्दगी गर्दे कारवां होगी

 *   *     *   *

जिन्दगीने मौतसे परदा किया

ऐ कफन तुने तो शरमिन्दा किया

*   *     *   *

मौतको ढुंढा किये थे हम कहां

वो थी हाथोंकी लकीरों में छिपी

*   *     *   *

(सौजन्य:मोतीबाईनो शेखो पृ.64)

Advertisements

زمرے

%d bloggers like this: