Posted by: Bagewafa | فروری 15, 2012

अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो – शहरयार

अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो – शहरयार

 

अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो
मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो

 

हर एक नक़्श तमन्ना का हो गया धुंधला
हर एक ज़ख़्म मेरे दिल का भर गया यारो

 

भटक रही थी जो कश्ती वो ग़र्क-ए-आब हुई
चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो

 

वो कौन था वो कहाँ का था क्या हुआ था उसे
सुना है आज कोई शख़्स मर गया यारो

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زمرے

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