Posted by: Bagewafa | فروری 17, 2012

ज़ालिम मिटाने में—–मुहम्मद मारफतियऔर हनीफ खान पांच दोस्तों के साथ

ज़ालिम मिटाने में—–मुहम्मद मारफतियाऔर हनीफ खान पांच दोस्तों के साथ

खुदा का शुक्र है पैदा हुए मुस्लिम घराने में
यह वोह दौलत है जो कायम रहेगी हर ज़माने में

हम उस दीन के मुहाफ़िज़ हैं जो आदम साथ लाये थे
हमारा तौर हाबीली रहा है हर ज़माने में

बड़ी तकलीफें सहकर नूह ने इस दीन को पहुँचाया
न मानी कौम तो की बददुआ अपने ज़माने में

जनाबे नूह की कश्ती बनी गहवारा मोमीन का
पहाड़ ऊंचे न आये काम काफिर को बचाने में

बारहीमी नज़र ने तोड़ डाला कसरे नमरूदी
खलीलुल्लाह का एहसान है हम पर हर ज़माने में

बचा कर अपनी इस्मत को जो पहुंचे क़ैद में यूसुफ़
मिसाली नौजवान बनकर रहें हैं हर ज़माने में

नबी के हाथ में लोहा जो आता मोम बन जाता
है दाउदी महक दुनिया के हर एक कारखाने में

खुदा ने मेरे ज़ख्मों में है रक्खा रीज्क कीड़ों का
सुकून मिलता है मखलूक ऐ खुदा के काम आने में

वोह देखो सब्रे अय्यूबी वोह बीमारी वोह तन्हाई
अहम् किरदार था अय्यूब का दीन को सजाने में

मुकाबिल ज़ुल्म के मूसा जो आये तानकर सीना
खुदा ने की मदद फ़िरौन सा ज़ालिम मिटाने में

किया मुर्दे को जिंदा वोह गिरे सजदे में फिर ईसा
मैं बन्दा हूँ खुदा का यह बताया उस ज़माने में

बड़ी मेहनत से पहुँचाया सभी नबियों ने इस दीन को
लहू देकर बचाई है शरीअत हर ज़माने में

फिर आये बनके रहमत सारे आलम के लिए आहमद
है किरदार ऐ मोहंमद (स.अ.व.) हम पे हुज्जत हर ज़माने में

हिफाज़त दीन की कैसे होती है बतलाया हैदर ने
चलो इस्लाम में रच बस के छायें हर ज़माने में

सुनो हामिद यकीनन वोह मुसलमान हो नहीं सकते
गुज़रती ज़िन्दगी जिनकी है लड़ने और लड़ाने में —

with Hanif Khan and 5 others.


زمرے

%d bloggers like this: