Posted by: Bagewafa | مارچ 8, 2012

मैं कौन हूँ?—- किश्वर नाहिद

मैं कौन हूँ?—– किश्वर नाहिद

मूज़े बेचती जूते बेचती औरत मेरा नाम नहीं

मैं तो वही हूँ जिसको तुम दीवार में चुनकर

मिस्ल-ए-सबा[1] बेख़ौफ़ हुए

यह नहीं जाना

पत्थर से आवाज़ कभी भी दब नहीं सकती

मैं तो वही हूँ

रस्म-ओ-रिवाज के बोझ तले

जिसे तुमने छुपाया

यह नहीं जाना

रौशनी घोर अँधेरों से कभी डर नहीं सकती

मैं तो वही हूँ

गोद से जिसकी फूल चुने

अंगारे और काँटे डाले

यह नहीं जाना

ज़जीरों से फूल की ख़ुशबू छुप नहीं सकती

मैं तो वही हूँ

मेरी हया के नाम पे तुमने

मुझको ख़रीदा मुझको बेचा

यह नहीं जाना

कच्चे घड़े पे तैर के सोहनी मर नहीं सकती

मैं तो वही हूँ

जिसको तुमने डोली बिठा के

अपने सर से बोझ उतारा

यह नहीं जाना

ज़ेहन ग़ुलाम अगर है क़ौम उभर नहीं सकती

पहले तुमने मेरी शर्म-ओ-हया पे ख़ूब तजारत[2] की थी

मेरी ममता, मेरी वफ़ा के नाम पे ख़ूब तजारत की थी

अब गोदों में ज़ेहनों में फूलों के खिलने का मौसम है

पोस्टरों पर नीम बरहना[3]

मूज़े बेचती जूते बेचती औरत मेरा नाम नहीं।

मायने:-
1. हवा की तरह
2. व्यापार, धंधा
3. आधे नंगे

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