Posted by: Bagewafa | اپریل 16, 2012

मक्तूले गुजरात एहसान जाफरी(अहमदाबादी)के शेर और आजाद नज्म

(1929-2002)

मक्तूले गुजरात एहसान जाफरी(अहमदाबादी)के शेर और आजाद नज्म

 

काम मुश्किल सही आसान बनाना होगा

हुस्नो तदबीरसे इमकान बनाना होगा

 

युं तो भगवान बना डाले हजारों हमने

अब हर एक शख्सको इनसान बनाना होगा

….

ए नवजवां

क्या खबर है तुझे

तु तो बेफिकर अपने हाथोमें

फूलोंका गुंचा लिये

पुर अमन सडक पर गाते हुए

गुनगुनाते हुए

अपनी सफ्फाफ कंचनसी आंखोमें

आने वाले हसीन लम्होंकी झलक

बसाए हुए

खरामा खरामा

शादमां चला जा रहा है

शादमां चला जा रहा है

 

घर पर तेरे निगाहें सड्क पर बिछाये हुए

मुंतजिर है कोई

तेरे लिये

और खूशओ खुर्र्म

तनोमंद बेटा तेरा

अपनी मांके जानु पर कसमसाये हुए

चमकती हुई अपनी आंखोमें

नीले आकाश के

सारे तारे बसाये हुए

और अपनी मासूम हस्तीकी

दिलकश खूश्बूएं

फिजांमें रचाये हुए

चहचहा रहा होगा –पापा पापा

और तु सोच रहा होगा कि तु

यकायक पहोंचकर

अपनी मेहबुबाकी जुल्फोंमे

सजा देगा फूलोंका गुंचा

और अपने लख्ते जिगरको

अपनी बाहोंमें भर लेगा तु

मगरा क्या खबर है तुझे ए नवजवान

कैसी साजिशा हो रही है

तेरे पीछे

अपनी इस हसीन दुनियाको

जहां हम सबके घर है

जिन घरोंमें

हमारी मेहबुबाएं  अपने  बच्चोंको लिये

घरकी दहलीज पे सर लगाये हुए

ख्वाबोंकी दुनियामें

सजाए बैठी है

और हमारी मुंतजिर है

पल भरमें सबा खतम हो जायेगा

कैसी साजिश हो रही है

एटम बम बनाये जा रहे हैं

अभी वक़्त है

वक़्त बाकी है कुछ करनेके लिये

अपने ख्वाबोंसे बाहर निकल

और किब्ल उस्के कि एटम बम गिरे

घरोंपर हमारे

होशियार हो जाओ

अभी वक़्त बाकी है

घर बचानेके लिये

—एहसाना जाफरी

 

…..

अफसोसके तेरा घर बचा ना जां बची

तुने पनाह दे रख्खी कई बीसोंको

तु कटा वो कटे नफरतकी दीवारोंमें

तु जला घर जला वो जले

वहशीयोंके लावामें अंगारो में

ईंसानियत्की इक चाल कायम करदी

आह तुने मरकेभी  मिसाल कायम करदी

 

 

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