Posted by: Bagewafa | جون 28, 2012

बोल सकता है -गुजरात दंगो पर शायर मुनव्वर राना का दर्द

बोल सकता है -गुजरात दंगो पर शायर मुनव्वर राना का दर्द

 

मैं दहशतगर्द था मरने पे बेटा बोल सकता है

हुकूमत के इशारे पर तो मुर्दा बोल सकता है

 

हुकूमत की तवज्जो चाहती है ये जली बस्ती

अदालत पूछना चाहे तो मलबा बोल सकता है

 

कई चेहरे अभी तक मुँहज़बानी याद हैं इसको

कहीं तुम पूछ मत लेना ये गूंगा बोल सकता है

 

यहाँ पर नफ़रतों ने कैसे कैसे गुल खिलाये हैं

लुटी अस्मत बता देगी दुपट्टा बोल सकता है

 

बहुत सी कुर्सियाँ इस मुल्क में लाशों पे रखी हैं

ये वो सच है जिसे झूठे से झूठा बोल सकता है

 

सियासत की कसौटी पर परखिये मत वफ़ादारी

किसी दिन इंतक़ामन मेरा गुस्सा बोल सकता

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