Posted by: Bagewafa | جولائی 16, 2012

प्यासा जा रहा है—वसीम मलिक(रांदेर –सुरत)

प्यासा जा रहा है—वसीम मलिक(रांदेर –सुरत)

हमारे हकमें  बोला जा रहा है

हमें धोके में रखखा जा रहा है


पडोसियोंको जरूरता है रोशनीकी

हमारा घर जलाया जा रहा है.


हमारी जातको तकसीम करके

हमें किश्तोंमें लूटाया जारहा है


तमाशाई सभी सहमे हुए हैं

ये कैसा खेल खेला जा रहा है.



वसीम अबा साफ गोई तर्क कर दो

तुम्हे नफरत से देखा जा रहा है.


(courtesy: Facebook of wasim Malik)

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