Posted by: Bagewafa | اکتوبر 6, 2012

भाजपा, अल्पसंख्यक और 2014 के चुनाव–असगर अली इंजीनियर

Anonymous – Sep 10

भाजपा, अल्पसंख्यक और 2014 के चुनाव–असगर अली इंजीनियर

 

मुंबईमें हाल में आयोजित भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को संबोधितकरते हुए पार्टी अध्यक्ष श्री नितिन गडकरी ने कहा कि भाजपा को 2014 काचुनाव जीतने के लिए अल्पसंख्यकों को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करनाचाहिए। गोवा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गोवा में पार्टी, अल्पसंख्यकों का समर्थन हासिल करने में सफल रही और सत्ता हासिल कर सकी।उन्होंने कहा कि गोवा के अनुभव से सीख लेकर पार्टी को पूरे देश मेंअल्पसंख्यकांे को अपना समर्थक बनाने के लिए अभियान चलाना चाहिए।

 भाजपाके चुनावी गणित से भी उसकी साम्प्रदायिक सोच उसी तरह झलकती है जैसी किउसकी अन्य नीतियों और कार्यक्रमों से। भाजपा शायद यह मानती है कि देश केपूरे मुसलमान और पूरे हिन्दू एकसार समुदाय हैं और उनके सभी सदस्य एक हीपार्टी या गठबंधन का समर्थन करते हैं। भाजपा की शायद यह मान्यता है कि केवलसाम्प्रदायिक दृष्टिकोण ही मुसलमानों और हिन्दुओं की राजनैतिक पसंद कोनिर्धारित करता है और इसमें उनके क्षेत्रीय, भाषाई और वर्गीय हितों की कोईभूमिका नहीं होती। भाजपा हमेशा से दिन-रात मुसलमानों के खिलाफ विषवमन इसउम्मीद से करती आ रही है कि इससे मतदाताओं का साम्प्रदायिक आधार परध्रुवीकरण हो जावेगा, हिन्दू उसके झंडे तले आ जावेंगे और उनके मतों केसहारे वह सत्ता पर काबिज हो जाएगी। भारत को स्वतंत्र हुए आज 65 साल हो चुकेहैं परंतु इस अवधि में एक बार भी भाजपा का यह स्वप्न पूरा नहीं हो सका है।

कर्नाटकऔर मध्यप्रदेश की भाजपा सरकारों ने गौहत्या के विरूद्ध अत्यंत कड़े कानूनबनाए हैं जिनके निशाने पर भी मुख्यतः मुसलमान हैं। ये कानून पुलिस कोमुसलमानों को जबरन परेशान करने का एक और हथियार मुहैय्या कराएंगे। मैं यहनहीं कहता कि मुसलमानों को गौमांस खाना चाहिए-जैसा कि जमियतुलउलेमा ने भीमुसलमानों को सलाह दी है, उन्हें अपनी ओर से यह घोषणा कर देनी चाहिए कि वेहिन्दुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए गौमांस का भक्षण नहीं करेंगे।परंतु उन्हें एक कानून बनाकर उनकी पसंद के भोजन से वंचित करना और उन्हेंपुलिस के हाथों प्रताडि़त होने के लिए छोड़ देना किसी भी तरह से उचित नहींकहा जा सकता। गौहत्या के विरूद्ध बनाए गए कानून अत्यंत कड़े हैं और इनका विरोधवे दलित समुदाय भी कर रहे हैं जो परंपरागत रूप से गौमांस भक्षण करते आएहैं। हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय के दलित छात्रों ने अभी हाल मंेबीफ फेस्टिवल का विश्वविद्यालय प्रांगण में आयोजन किया था।

 गुजरातके सन् 2002 के कत्लेआम की जिम्मेदारी लेने तक से नरेन्द्र मोदी ने साफइंकार कर दिया। -ख्ेेाद प्रकट करने या मुसलमानों से क्षमायाचना करने का तोविचार भी संभवतः उनके मन में नहीं आया होगा। उल्टे, वे मुसलमानों से भूलजाओ और आगे बढ़ोकी नीति अपनाने की अपेक्षा करते हैं। मुसलमानों से माफीमांगने की बजाए वे सद्भावना अभियानचला रहे हैं जिसके अंतर्गत उन्होंनेगुजरात के कई जिला मुख्यालयों में एक दिन का उपवास रखा। गुजरात केमुसलमानों ने मोदी के बिछाए इस जाल में फंसने से इंकार कर दिया। सद्भावनारैलियों में मुसलमान शामिल नहीं हुए। केवल बोहरा मुसलमानों ने इनमें भागलिया क्योंकि उनके धर्मप्रमुख सैय्यदाना मोहम्मद बुरहानुद्दीन अपनेनिहित स्वार्थों के चलते मोदी को प्रसन्न रखना चाहते हैं (गुजरात की वक्फसंपत्तियों और वहां स्थित मजारों से सैय्यदाना को भारी-भरकम आय होती हैजिसका कोई हिसाब नहीं रखा जाता)।

 अगरभाजपा सचमुच मुसलमानों का समर्थन चाहती है तो उसे सबसे पहले बाबरी मस्जिदके ढ़हाए जाने के लिए मुसलमानों और पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए और इसबात पर सहमति देनी चाहिए कि बाबरी मस्जिद का उसी स्थान पर पुनर्निमाण होजहां वह पहले थी। भाजपा को नरेन्द्र मोदी को इस बात के लिए मजबूूर करनाचाहिए कि वे सन् 2002 के कत्लेआम के लिए मुसलमानों से माफी मांगे। भाजपा कोदेश को यह विश्वास दिलाना होगा कि आज के बाद वह साम्प्रदायिकता औरसाम्प्रदायिक हिंसा का सहारा नहीं लेगी और किसी भी स्थिति में देश को धोखानहीं देगी।

इससेभाजपा के पाप नहीं धुल जावेंगे परंतु इससे मेलमिलाप का रास्ता खुलेगा औरहम सब-हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई व आदिवासी-मिलजुलकर भारतीय राष्ट्र कोआगे बढ़ा सकेंगे और उसे एक शांतिपूर्ण व समृद्ध राष्ट्र बना सकेंगे। भाजपाको कंधमाल (उड़ीसा) में हुए दंगों के लिए ईसाईयों से भी क्षमायाचना करनीचाहिए। तभी हम एक ऐसा सच्चा राष्ट्र बन सकेंगे जो धर्म, जाति और नस्ल केआधार पर किसी से भेदभाव नहीं करता।

ऐसाहोने पर अल्पसंख्यक भाजपा को सत्ता में आने का मौका अवश्य देंगे बशर्ते वहअपने आश्वासनों से पीछे न हटे और सन् 70 के दशक की तरह, देश से विश्वासघातन करे। दक्षिण अफ्रीका में ठीक इसी रास्ते पर चल कर शांति और सद्भाव कावातावरण निर्मित किया गया था। सत्य, भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैऔर क्षमाभाव, प्राचीन भारत की अमूल्य विरासत है। अगर भाजपा को सचमुच भारतकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर गर्व है तो उसे इस राह पर चलने में संकोचनहीं होना चाहिए।

मुसलमानोंकी वक्फ संपत्तियां बचाने जैसे सतही वादों-जैसा कि श्री नितिन गडकरी नेकिया है- से मुसलमान भाजपा के झंडे तले नहीं आएंगे। मुसलमानों ने भाजपा औरउसकी साम्प्रदायिक राजनीति के चलते पिछले साठ सालों में बहुत दुःख झेलेहैं। केवल वक्फ संपत्तियों को बचाने से वे ये सब नहीं भूल जाएंगे। भाजपानेताओं को हम यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि कांग्रेस, केवल भाजपा का भयदिखाकर, मुसलमानों के वोट नहीं पा सकेगी। उसकी साम्प्रादयिक सोच का भीपर्दाफाश हो सकेगा और उसे भी मुसलमानों का दिल जीतने के लिए मेहनत करनीहोगी। तभी इन दो महान राजनैतिक दलों के बीच सच्ची प्रतियोगिता हो सकेगी औरदेश के सभी नागरिकों के बीच एकता का भाव पनपेगा। यही हमारी राजनीति काअंतिम लक्ष्य है। हमारा देश जिंदाबाद, हमारी एकता अमर रहे! (लेखक मुंबईस्थित सेंटर फाॅर स्टडी आॅफ सोसायटी एंड सेक्युलरिज्म के संयोजक हैं, जाने-माने इस्लामिक विद्वान हैं अंौर कई दशकों से साम्प्रदायिकता वसंकीर्णता के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं।

 मूल अंग्रेजी से अमरीश हरदेनिया द्वारा अनुदित

 http://hastakshep.com/?p=21056

 

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