Posted by: Bagewafa | اکتوبر 7, 2012

इस्लाम मुख़ालिफ़ सवालों के जवाब (7अक्तूबर, 2012)-डो.-अजीज बर्नी(फेसबूक)

इस्लाम मुख़ालिफ़ सवालों के जवाब (7अक्तूबर, 2012)-डो.-अजीज बर्नी(फेसबूक)

मिस्टर अजय सिंह आप के सवालों के सबसे सटीक जवाब तो आलिमे दीन ही देंगे, अगर उन्होंने इस बकवास पर तवज्जो देने की ज़रूरत समझी, चूँकि मेरी फेसबुक वाल पर ये सवाल नामा मेरे सामने था, तो मेरा ख़ामोश रहना मुम्किन नहीं था लेकिन ये जवाब तुम्हारे इस्लाम कुबूल करने के लिए नहीं हैं, इस्लाम क़ुबूल करने से पहले बाज़मीर और नियत साफ़ होना ज़रूरी है, जो तुम्हारे लिए मुम्कि

न नज़र नहीं आता, बहरहाल (1 ) ख़त्ना और मुस्लमान- डाक्टर जिन हिंदुओं को बीमारीयों से बचने के लिए ख़त्ना की सलाह देते हैं क्या वो ख़त्ना के बाद मुसलमान हो जाते हैं, इस्लाम इस बात को पहले दिन से ही जानता है, जो तुम्हें डाक्टर की सलाह के बाद समझ में आती है। (2) 2-3 दिन के मासूम बच्चे को जहन्नुम, ये तुम ने कहां से पढ़ लिया (3 ) – जन्नत में हूरें मर्दों को तो औरतों को क्या, कृष्ण जी को गोपियां तो रुक्मणी जी को गोप, क्या पढ़ा है कहीं? जब कि द्रौपदी के 4 पति की मिसालें सामने हैं। (4 ) – जिहाद और आतंकवाद- अपने अंदर की बुराईयों से लड़ना जिहाद है, आरएसएस के ज़रिए ट्रेनिंग दे कर असीमानंद, प्रज्ञा सिंह, पुरोहित और उपाध्याय ने जो किया वो आतंकवाद है। (5 ) – गुणवान को जन्नत क्यों नहीं, रावण गुणवान था, दशहरे पर पुतला क्यों जलाते हो, स्वर्ग की कामना क्यों नहीं करते हो। (6 ) – हज़रत आईशा रज़ियल्लाहू अन्हू से निकाह। मेंसुरेशन पीरियड (Menstruation Period) शुरू हो जाने के बाद लड़की शादी के लायक़ हो जाती है, इस प्रथा को हिन्दू धर्म में आज तक भी देखा जा सकता है, उम्र का फ़ासला – श्री राम के पिता श्री दशरथ की पहली और छोटी पत्नी के बीच उम्र का क्या अंतर था। (8) – अल्लाह का कोई रूप नहीं- निरंकार भगवान की कल्पना हिंदुओं में है या नहीं, सभी साकार हैं तो उनकी रचना करने वाला कौन? (9) – क़ुरान और अन्य धर्म ग्रंथों में अंतर- क़ुरान सारी दुनिया के लिए कॉन्स्टीट्यूशन आफ़ लाईफ़ (Constitution of Life) (जीवन का संविधान) है। रामायण श्री राम की जीवन गाथा- बाइबल- हज़रत ईसा मसीह की बायोग्राफी (10) – सबको एक जैसा पैदा क्यों नहीं किया – सब एक जैसे होते तो नेकी के रास्ते पर मदद कर के जन्नत हासिल करने वाला कौन होता कर्मों के आधार पर जन्नत जहन्नुम कैसे तय होती । (11) – हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम से बेहतर ना कोई हुआ ना कोई होगा (12)-ख़ानए काबा में मूर्ती- संगे अस्वद ख़ानए काबा के बाहर लगा पत्थर है जो एकता का प्रतीक है पूजा नहीं, तारीख़ उठा कर पढ़ो। (13) हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की शादियां बराबरी का दर्जा और इस्लाम के पैग़ाम के लिए- सेक्स की मिसालें देखना है नदी में नहाती गोपियों के कपड़े उठाने में देखो, द्रौपदी के चीर हरण में देखो, सीता जी के अपहरण में देखो, देवदासियों के प्रचलन में देखो- क्षमा के साथ (हम सभी धर्मों का आदर करते हैं) (14) – औरतें मस्जिदों में क्यों नहीं- मैं तुझसे मिलने आई मंदिर जाने के बहाने की तरह कोई कभी ना लिख सके मैं तुझ से मिलने आई मस्जिद जाने के बहाने, फिर भी तुम्हें इस्लाम में अच्छाई नज़र न आती हो तो सोचना एक तरफ़ हज़ारों लाखों साल पुराना मज़हब और फिर भी आबादी उनसे बहुत कम जिनका मज़हब सिर्फ 1400 साल पुराना। कोई बात तो है मज़हबे इस्लाम में, तुम मानो या ना मानो……………..

 

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