Posted by: Bagewafa | اکتوبر 9, 2012

दीवाना बना दे —-बहज़ाद लखनवी

दीवाना बना दे —-बहज़ाद लखनवी

दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे
वरना कहीं तकदीर तमाशा ना बना दे

ऐ देखनेवालों मुझे हंस हंस के ना देखो
तुम को भी मोहब्बत कहीं मुझसा ना बना दे

मैं ढूँढ़ रहा हूँ मेरी वो शमअ कहाँ है
जो बज़्म की हर चीज़ को परवाना बना दे

आखिर कोई सूरत भी तो हो ख़ाना-ए-दिलकी
काबा नहीं बनाता है तो बुतख़ाना बनादे

"बहज़ाद” हर एक जाम पे इक सजदा-ए-मस्ती
हर ज़र्रे को संग-ए-दर-ए-जानां ना बना दे

 

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