Posted by: Bagewafa | اکتوبر 11, 2012

पैसों ने डाली अन्ना और केजरीवाल में दरार— हिसाम सिद्दीकी

पैसों ने डाली अन्ना और केजरीवाल में दरारहिसाम सिद्दीकी


नई दिल्ली! ईमानदारी का चोला पहनकर देश को ईमानदार बनाने का ठेका लेने निकले अन्ना हजारे ने दिल्ली में केजरीवाल एंड कम्पनी के साथ मिलकर घमंडियों और बदजुबान लोगों का जो गरेाह तैयार किया था उस गरोह में पैसों और आरएसएस की वजह से दरार पड़ गई है। अन्ना हजारे, किरन बेदी और लाल कृष्ण आडवानी के पुजारी रहे सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज संतोष हेगडेे रामदेव के जरिए खुलकर आरएसएस खेमे में चले गए तो अन्ना हजारे के शार्गिद रहे अरविंद केजरीवाल ने अलग सियासी पार्टी बनाने का एलान कर दिया। बजाहिर तो केजरीवाल को भी आरएसएस और बीजेपी से कोई परहेज नहीं है लेकिन वह सेक्युलरिज्म और फिरकापरस्ती दोनों नावों की सवारी करना चाहते हैं इसलिए खुलकर आरएसएस खेमे के साथ नहीं जा रहे हैं।
अरविंद और अन्ना कुछ भी कहें खबर है कि इन दोनों के दरमियान टकराव की असल वजह चंदे की शक्ल में देश विदेश से इन्हें मिलने वाला करोड़ों रूपया है। पैसों की वजह से ही अन्ना का इंतहाई करीबी साथी और बरसों से उनके लिए पीए जैसा काम करने वाला सुरेश पठारे भी अन्ना से अलग हो गया है। सुरेश ने खुद तो कहा कि उसने इस्तीफा दिया है लेकिन अन्ना एंड कम्पनी का कहना है कि अन्ना ने सुरेश को निकाल दिया है।
पैसों के बंटवारे के झगड़े पर अन्ना और केजरीवाल दोनों ही कुछ बोल तो नहीं रहे हैं लेकिन अपने-अपने तरीके से दोनों ने यह बात पूरी तरह साफ कर दी है कि दोनों के दरमियान असल मसला पैसा ही है। अरविंद केजरीवाल की तरफ से खबर छपवाई गई कि अरविंद ने इंडिया अंगेस्ट करप्शन और उनके दूसरे एनजीओ ‘‘पब्लिक काज रिसर्च फाउंडेशन’’ (पीसीआरएफ) के अकाउंट में बची हुई दो करोड़ की रकम का चेक अन्ना हजारे को देने के लिए कहा था लेकिन अन्ना ने नहीं लिया। कहा गया कि यह चेक लेकर अरविंद केजरीवाल रालेगढ सिद्धी भी गए थे लेकिन अन्ना ने वह पैसा लेने से इंकार कर दिया। दूसरी तरफ अन्ना कैम्प की जानिब से कहा गया कि अरविंद सिर्फ सवा करोड़ का चेक लेकर गए थे।
अन्ना के करीबी जराए के मुताबिक टकराव की शुरूआत तब हुई जब अन्ना ने केजरीवाल से चंदे की आमदनी और खर्चे का हिसाब मांगा। अन्ना ने केजरीवाल से यह भी कहा कि उनके आंदोलन से पूरे देश में जो वालियंटर्स जुड़े थे उनकी फेहरिस्त भी दे दें। लेकिन केजरीवाल ने यह फेहरिस्त देने से यह कहकर इंकार कर दिया कि वह वालियंटर्स उनके बनाए हुए हैं और उन्होंने हिसाब किताब देने में भी आनाकानी की। उन्नीस सितम्बर को दिल्ली में इन लोगों की जो मीटिंग हुई उसमें हिसाब-किताब की बात पर दोनों गरेाह में काफी गर्मागरम बहस भी हुई। जब केजरीवाल ने यह बताया कि पिछले महीने जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन पर चालीस लाख इकहत्तर हजार रूपए खर्च हुए है तो अन्ना और किरन बेदी जैसे उनके साथी इतना खर्चा तस्लीम करने के लिए तैयार नहीं हुए। अन्ना का कहना था कि वह भी कई सालों से आंदोलन कर रहे हैं। महज एक हफ्ते के आंदोलन में चालीस लाख इकहत्तर हजार रूपए कैसे खर्च हो गए? खबर है कि अन्ना के इस सवाल पर केजरीवाल भड़क गए और उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के बहकाने में आकर आप मेरी नियत पर शक कर रहे हैं। अन्ना ने कहा कि ऐसा नहीं है हम तो सिर्फ हिसाब साफ करना चाहते हैं। बात इतनी बढ़ी कि अन्ना उठकर मीटिंग से बाहर जाने लगे तो सारे लोगों ने किसी तरह खुशामद करके उन्हें रोका। लेकिन टकराव का कोई हल नहीं निकला।
बाद में अरविंद केजरीवाल की जानिब से कुछ अखबारों में यह खबर छपवाई गई कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन और पीसीआरएफ के अकाउंट में कोई पैसा नहीं है। नतीजा यह कि अरविंद केजरीवाल को मैग्सेसे अवार्ड में मिली पच्चीस लाख रूपए की रकम के फिक्सड डिपाजिट को तोड़ कर फिलहाल काम चलाया जा रहा है। सवाल यह है कि अगर केजरीवाल की पार्टी के पास रोजमर्रा के काम चलाने के भी पैसे नहीं है तो यह लोग नई पार्टी बनाकर मुल्क को कंाग्रेस और बीजेपी का मुतबादिल (विकल्प) कैसे फराहम करेंगे।
खबर है कि हिन्दुस्तान में सरकार और जम्हूरियत को कमजोर करने के लिए अन्ना गरोह और अरविंद केजरीवाल वगैरह के जरिए चलाए जाने वाले एनजीओज को अमरीका और देश के अंदर बैठे कुछ लोगों से चंदे की शक्ल में करोड़ो रूपया मिल रहा था। दरमियान में अन्ना के आंदोलन ने जोर पकड़ा तो इन्हें मिलने वाली चंदे की रकम में भी इजाफा हो गया क्योंकि इन लोगों पर पैसा लगाने वालों को यह यकीन होने लगा था कि शायद यह लोग हिन्दुस्तानी सरकार और जम्हूरियत दोनों को कमजोर करने में कामयाब हो जाएंगे। लेकिन पिछले दिनों जब यह पता चल गया कि यह लोग मीडिया में हंगामा तो मचा सकते हैं लेकिन सरकार और जम्हूरियत को कमजोर करने में कामयाब नहीं हो सकते तो मुल्क के अंदर और बाहर बैठी ताकतों ने इन लोगों को पैसा देना बंद कर दिया।
अन्ना से अलग होकर रामदेव के जरिए आरएसएस की गोद में बैठ जाने के बावजूद अरविंद केजरीवाल के घमंड में कोई कमी नहीं आई है। उन्होंने कहा कि मुल्क की दोनों बड़ी पार्टियां यानि बीजेपी और कांग्रेस आपस में मिली हुई है। इन दोनों को उखाड़ फेंकने की गरज से ही वह नई पार्टी बना रहे हैं। उन्हें यकीन है कि उनकी पार्टी पार्लियामेंट पहुंच कर मुल्क की सत्ता संभाल लेगी। सत्ता संभालते ही यह लोग हुकूमत का मौजूदा सिस्टम खत्म कर देंगे और मुल्क की सत्ता चंद लोगों के हाथों से निकाल कर आम लोगों के हाथों में सौंप देंगे।
दूसरी तरफ अन्ना हजारे अपने असली भगवा रंग में आ गए। इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीटिंग में अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों से लड़ाई करने के बाद आरएसएस के कई लीडरों के साथ दिल्ली में पहले से मौजूद उसी योग व्यापारी रामदेव के पास पहुंच गए जो खुद कई सालों से कालेधन के कारोबार में लगे हुए हैं और अपना काला धन छुपाने के लिए विदेशों में जमा काला धन मुल्क में वापस लाने के आंदोलन का ड्रामा कर रहे हैं। खबर है कि रामदेव ने अन्ना को यह समझाया कि अरविंद केजरीवाल एंड कम्पनी तो नंगे-भूकों की भीड़ है और पैसों के बगैर कोई भी आंदोलन कामयाब नहीं हो सकता। उन्होंने अन्ना को यह भी समझाया कि उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं है। वह अपनी दौलत के सहारे अन्ना को देश का दूसरा गांधी बना देंगे। दिल्ली के गोल्फ लिंक के एक मकान में अन्ना हजारे और रामदेव के दरमियान आरएसएस से मुताल्लिक दो बड़े थैलीशाहों की मौजूदगी में तकरीबन दो घंटे तक जो खुफिया बातचीत हुई उसमें किरन बेदी भी मौजूद थी। किरन बेदी को पार्लियामेंट एलक्शन लड़ने का बहुत शौक है। खबर है कि बीजेपी उन्हें मरकजी वजीर कपिल सिब्बल के खिलाफ लोकसभा का अगला एलक्शन लड़ाने का वादा कर चुकी है। किरन बेदी को लगता है कि बीजेपी की हिमायत, पार्टी टिकट, अन्ना का साथ और रामदेव की बेशुमार दौलत के सहारे वह कपिल सिब्बल को हराकर हर कीमत पर लोकसभा पहुंच जाएंगी।

(जदीद मरकज7 -13 ओकटो12)

http://jadeedmarkaz.net/anchorstory_hindi.htm

Advertisements

زمرے

%d bloggers like this: