Posted by: Bagewafa | دسمبر 4, 2012

आहट नहीं जाती—-मुनव्वर राना۔نہیں جاتی۔۔۔۔۔۔منور رانا

نہیں جاتی۔۔۔۔۔۔منور رانا

Naheen Jati

आहट नहीं जाती—-मुनव्वर राना

 

मियां मैं शेर हूँ,  शेरो की गुर्राहट नहीं जाती

मैं लहज़ा नरम भी कर लू तो झिन्झालाहत नहीं जाती

 

मैं एक दिन बेखयाली में सच बोल बैठा था

मैं कोशिश कर चुका हूँ मुंह की कड़वाहट नहीं जाती

 

जहाँ मैं हूँ वहाँ आवाज़ देना जुर्म ठहरा है

जहाँ वो हैं वहाँ तक पांव की आहट नहीं जाती

 

मोहब्बत का ये ज़ज्बा जब खुदा की देन है भाई

तो मेरे रास्ते से क्यूँ ये दुनियाहत नहीं जाती

 

वो मुझ से बे तकल्लुफ हो के मिलता है मगर राना

ना जाने क्यों मेरे चेहरे से घबराहट नहीं जाती

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