Posted by: Bagewafa | جنوری 29, 2013

शिन्दे ने पोल खोली बेचैन हुई भगवा ब्रिगेड—– हिसाम सिद्दीकी

दहशतगर्दी में हिन्दुत्ववादियों के शामिल होने का खुलासा हुआ तो चीख उठा आरएसएस कुन्बा

शिन्दे ने पोल खोली बेचैन हुई भगवा ब्रिगेड___हिसाम सिद्दीकी


नई दिल्ली! जयपुर में गुजिश्ता दिनों कांग्रेस के चिंतन शिविर में तकरीर करते हुए मरकजी होम मिनिस्टर सुशील कुमार शिन्दे ने आरएसएस के हिन्दुत्ववादी दहशतगर्दों के चेहरे से नकाब हटाया तो पूरा आरएसएस कुन्बा उन पर टूट पड़ा। शिन्दे ने साफ कहा था कि उनके पास रिपोर्ट आई है कि आरएसएस और बीजेपी के ट्रेनिंग कैम्पों में दहशतगर्दी की टेªनिंग दी जाती है। इन कैम्पों से हिन्दुत्ववादी दहशतगर्द पैदा किए जाते हैं। इन लोगों ने समझौता एक्सप्रेस, मालेगांव, अजमेर शरीफ की दरगाह, हैदराबाद की मक्का मस्जिद समेत कई जगहों पर बम द्दमाके किए। द्दमाकों की जगह यह लोग ऐसी निशानियां डाल देते थे जिन्हें देखकर यह लगता था कि द्दमाके मुसलमानों ने किए हैं। शिन्दे के बयान पर बीजेपी और आरएसएस लीडरान ने तो चीखना शुरू ही कर दिया कांगे्रस में भी जर्नादन द्विवेदी की लाॅबी को शिन्दे का बयान बहुत नागवार गुजरा। उन्होंने कहा कि दहशतगर्दों का कोई मजहब नहीं होता। जर्नादन द्विवेदी बताएं कि एनडीए सरकार के दौरान छः सालों तक अटल बिहारी वाजपेयी व लाल कृष्ण आडवानी की सरकार और पूरा आरएसएस कुन्बा इस्लामी दहशतगर्दी, मुस्लिम चरमपंथी कहने के साथ-साथ यह प्रोपगण्डा करते रहे थे कि मुल्क के तमाम मदरसे दहशतगर्दी की नर्सरी बन गए हैं। उस दौरान जर्नादन द्विवेदी ने एक बार भी यह बात नहीं कही थी कि दहशतगर्दी और दहशतगर्दों का कोई मजहब नहीं होता। अच्छी बात यह हुई सीनियर वजीर कमलनाथ पार्टी के सीनियर लीडरान दिग्यविजय सिंह और मणिशंकर जैसे लोगों ने शिन्दे के साथ मजबूती से खड़े हो गए। इन लोगों ने कहा कि शिन्दे ने जो कुछ कहा है वह सद फीसद सच है इस लिए पूरी कांग्रेस शिन्दे के साथ है। अगर कमलनाथ दिग्विजय सिंह और मणिशंकर अय्यर जैसे लोग साफगोई से काम न लेते तो जर्नादन द्विवेदी की ब्राहमण लाबी शायद शिन्दे को ही मुल्जिम करार देती। मरकजी होम सेक्रेटरी आर.के.सिंह ने बाइस जनवरी को शिन्दे के बयान पर यह कह कर सरकारी मोहर लगा दी कि उनके पास दस ऐसे दहशतगर्दों के नाम और उनके खिलाफ पुख्ता सबूतों की रिपोर्ट है जिनका सीद्दा ताल्लुक आरएसएस से रहा है। उन्होंने बताया कि आरएसएस से ताल्लुक रखने वाले राजेन्द्र, मुकेश बसानी, सुनील जोशी, संदीप डांगे, देवेन्द्र गुप्ता, कमल चैहान, रामजी कलसांगरा, चन्द्रशेखर और असीमानन्द दहशतगर्दी में मुलव्विस रहे हैं। इनके खिलाफ होम मिनिस्ट्री के पास ठोस सबूत हैं।
बीजेपी और पूरे आरएसएस कुन्बे को सुशील कुमार शिन्दे का बयान इतना नागवार गुजरा कि पार्टी तर्जुमान मुख्तार अब्बास नकवी ने कह दिया कि अगर शिन्दे ने माफी न मांगी तो इसके बहुत ही संगीन नताएज होंगे। नकवी ने जिस अंदाज में संगीन नताएज की द्दमकी दी वह अंदाज ही दहशतगर्दी जैसा था। बीजेपी को इस बात पर भी सख्त एतराज है कि शिन्दे ने हिन्दू आतंकवादी क्यों कहा। सवाल यह है कि अगर सुनील जोशी, प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कर्नल श्रीकान्त पुरोहित जैसे लोग बम द्दमाके करा कर दहशत पैदा करेंगे तो क्या इन लोगों को मुस्लिम या ईसाई दहशतगर्द कहा जाएगा। दिग्विजय सिंह के इस सवाल का जवाब भी कोई नहीं दे रहा है कि अगर प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कर्नल पुरोहित जैसे का ताल्लुक आरएसएस से नहीं था तो उनके पकड़े जाने पर लाल कृष्ण आडवानी और सुषमा स्वराज वगैरह ने एतराज क्यों किया था और इन दहशतगर्दों की गिरफ्तारी के खिलाफ एहतजाज करने के लिए यह लोग वजीर-ए-आजम मनमोहन सिंह के पास क्यों गए थे? अगर इन दहशतगर्दों का बीजेपी और आरएसएस से ताल्लुक नहीं है तो राजनाथ सिंह गिरफ्तार शुदा प्रज्ञा सिंह ठाकुर से मुलाकात करने के लिए जेल क्यों गए थे।
याद रहे कि जब खुद को साध्वी बताने वाली प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कर्नल पुरोहित वगैरह को मालेगांव बम द्दमाकों के इल्जाम में गिरफ्तार किया गया था तो लालकृष्ण आडवानी और सुषमा स्वराज समेत बीजेपी के कई सीनियर सियासतदानों ने खूब शोर मचाया था। आडवानी ने मीडिया से बात करते हुए बड़ी हैरत जाहिर की थी कि आखिर सरकार ने एक साध्वी और एक देशभक्त फौजी को गिरफ्तार करके क्या पैगाम देना चाहती है। उस वक्त भी इन लोगों ने यही ड्रामा किया था जो आज कर रहे हैं और कह रहे हैं कि हिन्दू दहशतगर्दों को गिरफ्तार करके भारत सरकार ने दुनिया की सतह पर दहशतगर्दी के खिलाफ भारत की लड़ाई को कमजोर किया है। जब आडवानी एण्ड कम्पनी ने काफी शोर मचाया तो वजीर-ए-आजम मनमोहन सिंह ने अपने उस वक्त के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर को सबूतों के साथ आडवानी के पास भेजा था। प्रज्ञा सिंह और उसके दहशतगर्द गरोह के खिलाफ पुख्ता सबूत देखकर आडवानी की बोलती बंद हो गई थी। उस दिन के बाद फिर कभी भी आडवानी ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर और उसके साथियों की गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज नहीं उठाई। प्रज्ञा सिंह अकेली नहीं थी उसके साथ असीमानन्द जैसे आरएसएस के पुराने स्वंय सेवक भी दहशतगर्दी में मुलव्विस थे। शिन्दे के बयान से नाराज आरएसएस कुन्बे के लोगों का कहना है कि आरएसएस एक कौमपरस्त (राष्ट्रवादी) तंजीम है उस पर इस किस्म का इल्जाम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हकीकत में शिन्दे ने तो अब यह हकीकत बयान की है कि आरएसएस और बीजेपी के कैम्पों में हिन्दू दहशतगर्दी की टेªनिंग दी जाती है देश को यह हकीकत बहुत पहले से मालूम है। छः दिसम्बर सन् बानवे को आडवानी, मुरली मनोहर जोशी और विजय राजे सिद्दिंया समेत पचासों बीजेपी लीडरान ने अयोध्या में खड़े होकर अपने सामने बाबरी मस्जिद तुड़वा कर मुल्क के संविद्दान और भाईचारे पर जो चोट की थी क्या वह आरएसएस की दहशतगर्दी नहीं थी? पांच दिसम्बर सन् बाननवे को सीनियर स्वंय सेवक पंडित अटल बिहारी वाजपेयी ने लखनऊ से कारसेवकों की शक्ल में गुण्डों और समाज दुश्मनों के जत्थों को अयोध्या रवाना करते वक्त जो तकरीर की थी, वह तकरीर भी दहशतगर्दी की ही मिसाल थी उसी किस्म की जहरीली तकरीरें तो पाकिस्तानी दहशतगर्द गिरोहों के टेªनिंग कैम्पों में होती है और फिदाईन पैदा किए जाते हैं। अगर आरएसएस और बीजेपी के कैम्पों में हिन्दू दहशतगर्दी की टेªनिंग नहीं दी जाती है तो अटल बिहारी वाजपेयी ने इतनी जहरीली तकरीर कहां से सीखी थी? उन्हें इतनी जहरीली तकरीरें करने की टेªनिंग तो आरएसएस ने ही दी थी। अब अगर शिन्दे ने कह दिया कि आरएसएस और बीजेपी के कैम्पों में हिन्दू दहशतगर्दी की टेªनिंग दी जाती है तो इसमें इतना बुरा मानने की क्या जरूरत है। सीनियर कांग्रेस लीडर मणिशंकर अय्यर भी तमिलनाडु के ब्राहमण हैं। पढ़े लिखे हैं इसीलिए शायद उत्तर भारत के जर्नादन द्विवेदी जैसे ब्राहमणों जैसी बातें नहीं करते हैं। उनमें अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा कहने की सलाहियत भी है और हिम्मत भी है। इसीलिए उन्होंने कहा कि वह शिन्दे को उनके बयान के लिए दिल से मुबारकबाद देते हैं। आरएसएस के कैम्पों में हिन्दुत्ववादी दहशतगर्दी की टेªनिंग दी जाती है यह बात सभी को मालूम है लेकिन कहता कोई नहीं है। खुसूसन मुल्क के होम मिनिस्टर की कुर्सी पर बैठे वजीरों ने तो कभी भी इस तल्ख हकीकत को बयान नहीं किया। अब शिन्दे ने हिम्मत दिखाई है। हम पूरी ताकत से उनके साथ खड़े हैं। दिग्विजय सिंह दस साल तक मध्य प्रदेश के चीफ मिनिस्टर रहे हैं। कमलनाथ सन् अस्सी से मध्य प्रदेश से ही लोकसभा मेम्बर हैं। मध्य प्रदेश आरएसएस की हरकतों का मजबूत गढ़ है। संघियों की हरकतों के बारे में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जितना जानते हैं बांदा के रहने वाले और दिल्ली मंे जिंदगी गुजारने वाले जर्नादन द्विवेदी उतना नहीं जानते हैं। इसीलिए दिग्विजय सिंह और कमलनाथ ने शिन्दे की हिमायत और जर्नादन द्विवेदी की मुखालिफत की है। दिग्विजय सिंह तो गुजिश्ता ग्यारह सालों से कहते रहे हैं कि दहशतगर्दी की हरकतों में आरएसएस कुन्बे के स्वंय सेवक भी शामिल रहते हैं। उनके पास इसके ठोस सबूत भी हैं। अब तो खैर मरकजी होम मिनिस्टर और मरकजी होम सेक्रेटरी ने भी कह दिया है कि सरकार के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि जो हिन्दू दहशतगर्द पकड़े गए हैं उनका ताल्लुक आरएसएस से रहा है।

Jan 20-26

(सौजन्य:जदीद मरकज) http://www.jadeedmarkaz.net/special_report_hindi.htm

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