Posted by: Bagewafa | فروری 6, 2013

मुझे खुद भी मलाल होता है –मुनव्वर रानाمُجھے خُد بھی ملال ہوتا ہَے –مُنوّر رانا

मुझे खुद भी मलाल होता है –मुनव्वर राना

हर एक चेहरा यहाँ पर गुलाल होता है

हमारे शहर मैं पत्थर भी लाल होता है

मैं शोहरतों की बुलंदी पर जा नहीं सकता
जहाँ उरूज पर पहुँचो ज़वाल होता है

मैं अपने बच्चों को कुछ भी तो दे नहीं पाया
कभी कभी मुझे खुद भी मलाल होता है

यहीं से अमन की तबलीग रोज़ होती है
यहीं पे रोज़ कबूतर हलाल होता है

मैं अपने आप को सय्यद तो लिख नहीं सकता
अजान देने से कोई बिलाल होता है

पडोसीयों की दुकानें तक नहीं खुल्तीं

किसी का गाँव मैं जब इन्तिकाल होता है

مُجھے خُد بھی ملال ہوتا ہَے –مُنوّر رانا

 

ہر ایک چیہرا یہاں پر گُلال ہوتا ہَے

ہمارے شہر مَیں پتھّر بھی لال ہوتا ہَے

 

مَیں شوہرتوں کی بُلندی پر جا نہِیں سکتا

جہاں اُرُوج پر پہُنچو زوال ہوتا ہَے

 

مَیں اپنے بچّوں کو کُچھ بھی تو دے نہِیں پایا

کبھی کبھی مُجھے خُد بھی ملال ہوتا ہَے

 

یہِیں سے امن کی تبلِیغ روز ہوتی ہَے

یہِیں پے روز کبُوتر ہلال ہوتا ہَے

 

مَیں اپنے آپ کو سیّد تو لِکھ نہِیں سکتا

اذان دینے سے کوءی بِلال ہوتا ہَے

 

پڑوسِیّوں کی دُکانیں تک نہِیں کھُلْتِیں

کِسی کا گانو مَیں جب اِنْتِقال ہوتا ہَے

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