Posted by: Bagewafa | فروری 11, 2013

अशोक सिंघल ने कुंभ में अपने गरोह के साधुओं से मोदी की हिमायत में नारेबाज़ी कराई —हिसाम सिद्दीकी(जदीद मरकज)

अशोक सिंघल ने कुंभ में अपने गरोह के साधुओं से मोदी की हिमायत में नारेबाज़ी कराई —हिसाम सिद्दीकी

आरएसएस कुन्बे के साधु बनवाएंगे नरेन्द्र मोदी को वजीर-ए-आजम हिसाम सिद्दीकी इलाहाबाद!

भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस ने इलाहाबाद में चल रहे कुंभ के दौरान विश्व हिन्दू परिषद ने आरएसएस कुन्बे से जुड़े साधुओं के जरिए नरेन्द्र मोदी को अगला वजीर-ए-आजम बनवाने का एलान कराया है। एक तरफ तो बीजेपी और आरएसएस के कई लीडरान यह दावा कर रहे हैं कि इस वक्त मुल्क में नरेन्द्र मोदी से ज्यादा मकबूल (लोकप्रिय) लीडर दूसरा कोई नहीं, इसलिए मोदी ही अगले वजीर-ए-आजम बनेंगे तो दूसरी तरफ बीजेपी वोटो के लिए एक बार फिर राम का नाम बेचने के लिए तैयार हो गई है। कुंभ में ही विश्व हिन्दू परिषद के साधुओं की ‘‘धर्मससंद’’ में शरीक होकर बीजेपी सदर राजनाथ सिंह ने साफ कह दिया कि उनकी पार्टी अयोध्या में आलीशान राम मंदिर बनाए जाने के अपने बुनियादी वादे पर आज भी कायम है। राजनाथ सिंह के साथ मौजूद विश्व हिन्दू परिषद के लीडर अशोक सिंघल ने कहा कि इस साल जून जुलाई में होने वाले पार्लियामेंट के मानसून इजलास तक वह लोग इंतजार करेंगे कि पार्लियामेंट एक कानून पास करके अयोध्या में राम मंदिर बनने का रास्ता साफ करें। अगर पार्लियामेंट ने ऐसा नहीं किया तो विश्व हिन्दू परिषद पूरे मुल्क में बड़े पैमाने पर मंदिर के लिए आंदोलन छेड़ देगी। इस मौके पर अपने गरोह के संतो की धर्म संसद को खिताब करते हुए आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि मुल्क की सत्ता में बैठने वालों को अब मंदिर बनाना ही पड़ेगा। इस मौके पर रामानुजाचार्य ने धर्म संसद में नारे लगाते हुए कहा कि उन्हें ना एनडीए चाहिए या ना यूपीए उन्हें तो सिर्फ नरेन्द्र मोदी चाहिए। बीजेपी, आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद और उनके गु्रप में शामिल साधू संतो की बातों से वाजेह (स्पष्ट) हो गया है कि 2014 का लोकसभा एलक्शन जीतने के लिए आरएसएस कुन्बा हर हथकंडा अख्तियार करेगा। जाहिर है आरएसएस का सबसे बड़ा हथकंडा समाज में फिरकापरस्ती की बुनियाद पर एख्तेलाफात और टकराव पैदा करने का रहता है। अशोक सिंघल का बयान इस बात का सुबूत है कि आरएसएस कुन्बा बारिश के फौरन बाद पूरे मुल्क में राम मंदिर के बहाने फिरकापरस्त नफरत फैलाने की कोशिश करेगा, जिसका एलान अशोक सिंघल ने किया है। दो हजार चैदह का लोकसभा एलक्शन जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी जितनी उतावली दिखती है उतनी ही कन्फ्यूज भी है। एक तरफ तो नरेन्द्र मोदी के जरिए एलक्शन जीतने की कोशिश में हैं, दूसरी तरफ उसे यह भी लगता है कि सिर्फ नरेन्द्र मोदी से काम चलने वाला नहीं है इसीलिए बीजेपी और पूरे आरएसएस कुन्बे ने फिर से राम मंदिर का राग छेड़ दिया है। बीजेपी में आपस में एख्तेलाफ भी है विश्व हिन्दू परिषद के अशोक सिंघल ने धर्म संसद में बार-बार नरेन्द्र मोदी के नारे लगवाए तो उनके असिस्टेंट प्रवीण तोगडि़या ने इसकी मुखालिफत की। तोगडि़या ने कहा कि धर्म संसद में किसी को वजीर-ए-आजम बनाने या दूसरी कोई सियासी तजवीज नहीं आनी चाहिए। अपने साधुओं की धर्म संसद में तकरीर करते हुए आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने मोदी का नाम लिए बगैर कहा कि वजीर-ए-आजम के ओहदे के लिए उम्मीदवार तय करने का काम हमारा नहीं है। यह काम बीजेपी का है, लेकिन इतना जरूर बता दूं कि इस वक्त पूरे देश से एक ही आवाज उठ रही है, वही आवाज धर्म संसद में भी सुनाई दी है (मोदी को वजीर-ए-आजम बनाने की आवाज) अगर बीजेपी ने यह आवाज नहीं सुनी तो इसका खामियाजा भी बीजेपी को ही भुगतना पड़ेगा। इस तरह मोहन भागवत ने एक तरह से बीजेपी को यह हुक्म सुना दिया कि वह नरेन्द्र मोदी को ही वजीर-ए-आजम बनाने का एलान करे। उन्होंने कहा नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी सिर्फ एक तबके यानि हिन्दुओं की ही बात नहीं करती, अगर ऐसा होता तो गुजरात के असम्बली एलक्शन में इस बार सभी तबकों यानि हिन्दू और मुसलमानों ने मिलकर बीजेपी को जिताया नहीं होता। उन्होंने कहा कि सिर्फ हिन्दू मफाद (हितों) की बात करना मुनासिब नहीं है क्योंकि सिर्फ एक तबके की बात तो हिटलर किया करता था और हिन्दुस्तान में कोई हिटलर नहीं है। बीजेपी सदर राजनाथ सिंह वैसे तो जाती तौर पर नरेन्द्र मोदी को वजीर-ए-आजम की हैसियत से प्रोजेक्ट करने के हक में नहीं है क्योंकि अब वह खुद इस ओहदे के एक बड़े ख्वाहिशमंद बन चुके हैं राजनाथ सिंह के अलावा सीनियर स्वंय सेवक लाल कृष्ण आडवानी भी किसी भी तरह वजीर-ए-आजम बनने की अपनी ख्वाहिश दबा नहीं पा रहे हैं। उनके अलावा सुषमा स्वराज, मुरली मनोहर जोशी और अरूण जेटली कोई भी यह नहीं चाहता कि नरेन्द्र मोदी उनके वजीर-ए-आजम और कन्ट्रोलर बन जाएं। इस हकीकत के बावजूद विश्व हिन्दू परिषद आरएसएस और आरएसएस कुन्बे से जुड़े साधू संतो और बीजेपी के भी कुछ लीडरों की बयानबाजी में खुद राजनाथ सिंह भी उलझे हुए दिखते हैं। दो दिन पहले वह अपनी पार्टी के तमाम लोगों को हिदायत देते हुए कहते हैं कि अभी 2014 का एलक्शन दूर हैं। अगला वजीर-ए-आजम कौन होगा इसका फैसला एनडीए की मीटिंग में किया जाएगा, लेकिन ठीक दो दिन बाद ही उन्हें विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े उन्हीं साधुओं के बीच जाना पड़ता है जो नरेन्द्र मोदी को वजीर-ए-आजम बनाने के लिए जमीन-आसमान के कुलाबे एक किए हुए है। नरेन्द्र मोदी चूंकि खुद को वजीर-ए-आजम प्रोजेक्ट कराए जाने की मुहिम के पीछे हैं, इसलिए वह खुद भी किसी भी तरह इस मुहिम को ठंडा नहीं पड़ने देना चाहते । दिल्ली के श्रीराम कालेज आफ कामर्स के जलसे मंे तलबा के सामने तकरीर करते हुए नरेन्द्र मोदी ने गुजरात की तरक्की का ढिढोरा पीटते हुए यहां तक कह दिया कि जिस तरह उन्होंने गुजरात को तरक्की के रास्ते पर पहुंचाया है उसी तरह पूरे मुल्क को तरक्की के रास्ते पर पहुंचाना चाहते हैं। इन तमाम बयानबाजियों से इतना तो साफ हो गया कि भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस इक्कीसवीं सदी में भी मुल्क की तरक्की का कोई रास्ता नहीं बता पा रहे हैं। वह यह नहीं कह रहे हैं कि अगर उनकी हुकूमत बनी तो उनकी फारेन पालीसी क्या होगी? तरक्की की दौड़ में अमरीका जैसे तरक्कीयाफ्ता मुल्क या पड़ोसी मुल्क चीन का मुकाबला कैसे करेगी। वह यह नहीं बता पा रहे हैं कि मुल्क में गरीबी और बेरोजगारी दूर करने के लिए क्या करेंगे। वह सिर्फ यह मैसेज दे रहे हैं कि अगर मौका मिला तो नरेन्द्र मोदी को अपना वजीर-ए-आजम बनाएंगे और अयोध्या में आलीशान राम मंदिर की तामीर कराएंगे। यह बीजेपी और आरएसएस का दीवालियापन ही है किअवाम के वोट की परवा किए बगैर उन्हें विश्व हिन्दू परिषद और वीएचपी से जुड़े साधुओं के सहारे की जरूरत है।

Feb 3-9

Courtesy:

http://www.jadeedmarkaz.net/special_report_hindi.htm

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