Posted by: Bagewafa | فروری 19, 2013

रंग लाके रहेगी.—–मुहम्मदअली वफा

रंग लाके रहेगी.—–मुहम्मदअली वफा

 

तेजो तुंद ये हवा, रंग लाके रहेगी
मझ्लूमकी बद दुआ ,रंग लाके रहेगी

तु चाहे रहे उंचे फलक्बोस मकांनो में
झुग्गीसे गरीबोंकी सदा, रंग लाके रहेगी

ये बाग सारे झूल्मके हमारे खुंसे बने है
आ रही है अब खिंजा,  रंग लाके रहेगी

नफरत अदावत से फैले हैं ये अमराज
अब महोब्बतकी दवा , रंग लाके रहेगी

खूश ना हो मस्जिदें विरान देखा कर
ये मुजाहिदकी अजां, रंग लाके रहेगी

नफरतकी दीवारें चुननेमें लगे तुम.
एक दिन हमारी वफा, रंग लाके रहेगी

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