Posted by: Bagewafa | مارچ 11, 2013

गहरी साजिश में हुआ जिया उल हक का कत्ल___हिसाम सिद्दीकी

गहरी साजिश में हुआ जिया उल हक का कत्ल___हिसाम सिद्दीकी

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गड़बड़, राजा भैया के दावे और सर्किल अफसर को कत्ल करने का तरीका महज इत्तेफाक नहीं

लखनऊ! प्रतापगढ़ जिले के कुण्डा के सर्किल अफसर जियाउल हक का बेरहमी से कत्ल महज गांव वालों और पुलिस के दरमियान टकराव का नतीजा नही है इसके पीछे एक सोंची समझी शातिराना साजिश है। यह साजिश मुसलमानों के खिलाफ तो है ही समाजवादी पार्टी के सदर मुलायम सिंह यादव और वजीर-ए-आला अखिलेश यादव के खिलाफ भी है। जियाउल हक के लिए बताया गया कि वह प्रतापगढ़ केआस्थान गांव में पिछले साल जलाए गए मुसलमानों के घरों और गांव से मुसलमानों को भगाने समेत कई अहम मामलात की तहकीकात कर रहे थे बताया गया है कि वह आस्थान गांव की तहकीकाती रिपोर्ट चार मार्च को अदालत में पेश करने वाले थे। पिछले असम्बली एलक्शन में समाजवादी पार्टी को जिन तीन तबकों के नव्वे फीसद से ज्यादा वोट मिले थे उनमें यादव, मुसलमान और राजपूत तबके शामिल थे। राजनाथ सिंह के बीजेपी सदर बनाए जाने के फौरन बाद से उत्तर प्रदेश के राजपूतों को बीजेपी के साथ लाने की कोशिश तेज हो चुकी है इस हकीकत को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मुसलमानों और अखिलेश यादव हुकूमत के खिलाफ एक बड़ी साजिश हो रही है यह बात इसलिए सच साबित होती दिख रही है कि महज एक हफ्ते के अंदर प्रदेश के मुसलमानों में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव हुकूमत के खिलाफ बड़े पैमाने पर जो नाराजगी और अदम एतमाद (अविश्वास) का माहौल पैदा हो गया है वह माहौल खत्म करने में सालों का वक्त लग सकता है। जियाउल हक के जिले देवरिया के मुसलमान तो गुस्से में है ही प्रदेश के हर जिले के मुसलमान को इस वाक्ए ने हिला दिया है। इसीलिए देवरिया से लखनऊ, इलाहाबाद से अलीगढ़ तक के मुसलमानों में जबरदस्त नाराजगी का माहौल देखा जा रहा है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी तलबा यूनियन ने तो यहां तक एलान कर दिया कि अगर एक हफ्ते के अंदर जियाउल हक के अस्ल कातिलों यानि राजा भैया की गिरफ्तारी ना हुई तो बड़ी तादाद में मुस्लिम तलबा अलीगढ़ से लखनऊ कूच करेंगे। खबर लिखे जाने तक सीबीआई ने यह मामला अपने हाथों में लेकर पहले ही दिन चार एफआईआर दर्ज कर ली जिनमें राजा भैया को भी नामजद किया गया है। राजा भैया पर क्रिमिनल साजिश रचने की दफा में रिपोर्ट लिखी गई। सीबीआई टीम ने मौके पर पहुंच कर तमाम दस्तावेजात अपने कब्जे में ले लिए। इस दरमियान चार मार्च को वजीर-ए-आला अखिलेश यादव अपने सीनियर वजीर आजम खां को साथ लेकर देवरिया जिले में शहीद सीओ जियाउल हक के गांव जुआफर गए। उनके वहां जाने और जियाउल हक की बीवी परवीनआजाद व उनके कुन्बे के दीगर लोगों को मुत्मइन करने के बाद ही जियाउल हक की तदफीन हुई थी। अखिलेश यादव छः मार्च को प्रतापगढ़ के बलीपुर गांव जाकर वहां कत्ल किए गये प्रधान नन्हे यादव और उनके भाई के घर वालों से भी मिले, दोनों की बेवाओं को बीस-बीस लाख की माली मदद भी दी। कुण्डा के सर्किल अफसर जियाउल हक की शहादत की वजह महज गांव वालों के साथ टकराव नहीं बल्कि एक सोंची समझी सजिश का नतीजा है। यह बात इसलिए भी सच दिखती है कि उनकी बीवी परवीन आजाद का साफ कहना है कि वह कई बार उन्हें बता चुके थे कि कुण्डा के दबंग मेम्बर असम्बली और प्रदेश के साबिक वजीर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया उन्हें (जियाउल हक को) बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि वह राजा भैया के सामने हाजिरी लगाने नहीं जाते। दो मार्च को उनका जिस बेरहमी से कत्ल किया गया वह महज कोई टकराव या हादसा नहीं हो सकता। उन्हें कत्ल करने का तरीका ही बयान कर रहा है कि महज सबक सिखाने की गरज से उन्हें इतनी बेरहमी और दरिंदगी के साथ मारा गया। पहले उन्हें लाठी-डंडो से पीट-पीटकर मारा गया, कई जगह से टूट चुके उनके जिस्म को इधर-उधर घसीटा गया, वह भाग ना सके इसलिए कातिल दरिंदों ने नीचे से उनकी पैंट ऊपर करके दोनों पैरों को गोली मार कर तोड़ा, फिर उसके बाद उनकी पीठ पर गोली मारी जो सीने को चीरती हुई निकल गई। खतरनाक बात यह है कि उन्हें अपने साथ गांव के अंदर ले जाने वाले कुुण्डा थाना में तैनात राजा भैया केे चहीते इंस्पेक्टर सर्वेश मिश्रा, एसएसआई विनय कुमार, सीओ के हमराही इमरान और उनके साथ गए पुलिस वाले उन्हें गांव वालों और कातिलों से घिरा छोड़कर भाग खड़े हुए। उन्हें छोड़कर भागने वाले पुलिस वालों को मोअत्तल तो कर दिया गया लेकिन मोअत्तली की कार्रवाई काफी नहीं है उन्हेांने जो हरकत की है उसके लिए तो उन्हें भी कत्ल की साजिश करने वाले मुल्जिमान में शामिल करके रिपोर्ट में नामजद किया जाना चाहिए। भगोड़े पुलिस वालोंसे पुलिसिया अंदाजमें ही पूछगछ की जाए तो इस साजिश का पर्दा फाश हो सकता है। शहीद सीओ की बीवी परवीन आजाद के मतालबे पर अखिलेश यादव और आजम खान चार मार्च को तकरीबन साढ़े चार बजे जब देवरिया जिले में जियाउल हक के गांव जुआफर पहुंचे तो एक बड़ी भीड़ उनके खिलाफ नारेबाजी कर रही थी। उस भीड़ में शहीद सीओ और उनके कुन्बे से हमदर्दी रखने वाले भी बड़ी तादाद में थे तो काफी लोग ऐसे भी थे जिनका ताल्लुक मुख्तलिफ सियासी पार्टियों से था और वह सिर्फ सियासत कर रहे थे। बामुश्किल तमाम अखिलेश और आजम खां पीछे के रास्ते से उनके घर पहुंचे। जहां परवीन और उनके कुन्बे के साथ तफसीली बातचीत की। बातचीत के दौरान परवीन ने वजीर-ए-आला के सामने हाथ से लिखे आठ मतालबात पेश किए और जिद की कि मतालबात की दूसरी कापी पर वजीर-ए-आला दस्तखत करें। आजम खां ने मदाखिलत करते हुए परवीन को समझाते हुए बताया कि किसी वजीर-ए-आला से इस तरह रसीद नहीं ली जाती, हम लोग आपके पास आए हैं आपको हमारी ईमानदारी पर शक नहीं करना चाहिए और हम पर भरोसा करना चाहिए। आजम खां के समझाने पर परवीन ने जिद छोड़ी। उन्होंने जो मतालबात किए हैं उनमें राजा भैया समेत इस मामले में नामजद सभी मुल्जिमान की गिरफ्तारी, पूरे मामले की सीबीआई के जरिए तहकीकात, उनके और उनके कुन्बे की हिफाजत का बंदोबस्त, उन्हें और कुन्बे के आठ लोगों को उनकी तालीम के एतबार से सरकारी मुलाजिमत जैसे मतालबात शामिल हैं। वजीर-ए-आला अखिलेश यादव ने इस मामले की सीबीआई तहकीकात समेत सभी मतालबात मंजूर कर लिए और फौरन ही माली इमदाद की शक्ल में पच्चीस लाख रूपए का चेक परवीन के नाम और पच्चीस लाख का ही चेक जियाउल हक के वालिद शमसुल हक के सुपुर्द किया और यकीन दिलाया कि उनके कुन्बे को हर मुमकिन मदद दी जाएगी। जियाउल हक के कत्ल के पीछे गहरी साजिश है उस साजिश में यह मामला पांच मार्च को उस वक्त और उलझ गया जब शहीद सीओ की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई। रिपोर्ट में लिखा गया कि उनके जिस्म में सिर्फ एक गोली लगी जो उनके फेफड़े और सीने को चीरती हुई बाहर निकल गई, इसके अलावा उनके जिस्म पर लाठी-डंडों और लोहे की राड से मारे जाने के आठ से दस निशान पाए गए। इससे पहले जियाउल हक की बीवी परवीन और उनके घरवालों ने कहा था कि उनके दोनों पैरों में गोली मारी गई थी और एक गोली सीने में मारी गई थी। परवीन पहले तो अपनी बात पर अड़ी रही लेकिन जब डाक्टरों की एक टीम ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ परवीन से मुलाकात की और तफसीली बातचीत की तो परवीन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को तस्लीम कर लिया और यह तस्लीम कर लिया कि उन्हें एक ही गोली लगी पैरों में चोट के निशान शायद लोहे के राड के हो सकते हैं। शक इसलिए भी होता है कि खुद राजा भैया ने चार मार्च को असम्बली के अंदर बयान देते हुए और बाद में मीडिया से बात करते हुए बार-बार इस बात पर जोर दिया था कि सीओ जियाउल हक और प्रधान नन्हे यादव के भाई सुरेश यादव दोनों को ही सर्विस रिवाल्वर (पुलिस की रिवाल्वर) से गोली मारी गई है। पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर लिखते हैं कि चूंकि गोली सीओ के जिस्म को चीरते हुए बाहर निकल गई और फिर पुलिस उसे बरामद भी नही कर सकी, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि उनके जिस्म मेें कौन सी गोली लगी। गोली की किस्म के बारे में राजा भैया के दावे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट दोनों में जो तजाद (विरोधाभास) है, वह भी किसी साजिश का ही हिस्सा दिखता है। दूसरी बात यह कि अगर सीओ की बीवी और दीगर घर वालों को उनके जिस्म में तीन गोलियों के निशान दिखे तो पोस्टमार्टम करने वालों को एक ही क्यों दिखा? वैसे बाद में समझाने बुझाने और डाक्टरों से बात करने के बाद सीओ हक की बीवी परवीन आजाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सही मानने पर राजी हो गई। यह पूरा मामला अब इंसानियत के दायरे से बाहर निकलकर पूरी तरह सियासत का शिकार हो चुका है। समाजवादी पार्टी के कौमी जनरल सेक्रेटरी रामगोपाल यादव से जब मीडिया नुमाइंदो ने राजा भैया कि गिरफ्तारी पर सवाल किया तो वह नाराज हो गए और बोले कि यह मामला सीबीआई को भेजा जा चुका है। गिरफ्तारी के सिलसिले में सीबीआई डायरेक्टर से सवाल कीजिए। राम गोपाल को अच्छी तरह मालूम था कि उस वक्त तक अभी उत्तर प्रदेश सरकार ने ही इस मामले की तहकीकात करने के लिए सीबीआई को लिखा था। मरकजी हुकूमत और सीबीआई ने यह केस लेने की मंजूरी नहीं दी थी, इसलिए जब तक सीबीआई इस मामले की तहकीकात करने का एलान ना कर दे उस वक्त तक मुल्जिमान की गिरफ्तारी समेत मुकदमे से मुताल्लिक तमाम सवालात के जवाब उत्तर प्रदेश हुकूमत और समाजवादी पार्टी को ही देने चाहिए थे। बीएसपी सुप्रीमों मायावती ने एलान कर दिया कि उनकी पार्टी इस मामले में सड़कों पर उतरेगी। कांगे्रेस सदर निर्मल खत्री ने कुण्डा सीओ की शहादत की जगह से लखनऊ तक पैदल मार्च करने का एलान कर दिया है तो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के तलबा ने भी अलीगढ़ से लखनऊ तक पैदल मार्च का एलान किया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस की साबिक सदर रीता बहुगुणा जोशी छः मार्च को सीओ की बीवी परवीन से मिलने उनके गांव पहुंची और कानूनी लड़ाई में उनका हर तरह से साथ देने का वादा किया। उनसे एक दिन पहले प्रदेश कांग्रेस शिकायत सेल के कनवीनर सिराज मेहंदी की कयादत में पांच मेम्बरान का एक वफ्द परवीन आजाद से मिलने जा चुका था। राजा भैया के इस्तीफे के बाद उनकी गिरफ्तारी का मतालबा तेज हो गया है, इसके साथ राजा भैया बनाम आजम खां के टकराव की बात भी सामने आई है। राजा भैया ने अपना इस्तीफा देते वक्त कहा था कि उन्हें वजारत से हटवाने वाले अपने मकसद में कामयाब हो गए। उस वक्त हालांकि उन्हांेने किसी का नाम नहीं लिया था मगर जब वजीर-ए-आला मकतूल प्रधान नन्हें यादव के घर वालों से मिलने और उन्हें मुआवजे का चेक देने गए तो राजा भाइया के हामियों ने आजम खां मुर्दाबाद और राजा भैया व अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे लगाकर और आजम खां ने यह कहकर कि इस वाक्ए से पार्टी को नुक्सान पहुंचेगा अपना मंशा साफ कर दिया था। राजा भैया और आजम खां के बीच मकतूल सीओ जियाउल हक के बहाने मखफी तलवारे खिंचने का कोई पहला मामला नहीं है। इसे पहले जब मोहम्मद मुस्तफा प्रतापगढ़ के डीएम थे तो खासे दबंग होने के बावजूद वह राजा भैया से खुद को बचाने की फरियाद करते नजर आए थे और फिर आजम खां ने उन्हें अपने जिले रामपुर बुलवा लिया था। हालांकि अभी तक राजा भैया समाजवादी पार्टी के लिए जेल जाने तक की बात कर रहे हैं मगर इस्तीफा देते वक्त जिस तरह पार्टी के कुछ ठाकुर मेम्बरान असम्बली उनके इर्द गिर्द नजर आए थे उसे नए सियासी हिसाब किताब के इशारे भी मिले क्योंकि बीजेपी के कौमी सदर राजनाथ सिंह और राजा भैया के रिश्ते किसी से पोशीदा नहीं है। सीओ जियाउल हक का कत्ल एक मंसूबाबंद साजिश का नतीजा था जिसमें कुछ पुलिस वाले भी शामिल थे। इसका अंदाजा इससे भी होता है कि बलीपुर गांव जहां के प्रधान नन्हे यादव को फिर उनके भाई सुरेश यादव और सीओ जियाउल हक को बेरहमी से कत्ल किए जाने का वाक्या पेश आया वह गांव हथिगवां थाना हल्के के तहत आता है। इतना बड़ा कांड हो गया मगर हथिगवां थाने के पुलिस वालों के ऊपर कोई आंच नहीं आई ऐसा कैसे हुआ? सवाल है कि जब गांव में बवाल हो रहा था और सुरेश यादव व सीओ जियाउल हक का कत्ल हुआ उस वक्त हथिगवां थाने के एसओ मनोज शुक्ला कहां थे? हल्के के चैकी इंचार्ज और बीट सिपाही क्या कर रहे थे। बताया जाता है कि यह सब लोग हंगामा शुरू होते ही सीओ जियाउल हक को छोड़कर पहले ही पीछे से भाग लिए थे। उनके साथ इंस्पेक्टर कुण्डा सर्वेश मिश्रा, गनर इमरान और एसएसआई विनय कुमार सिंह थे जो भीड़ के इकट्ठा होते ही सीओ जियाउल हक को छोड़कर खेत में छुप गए थे। इसीलिए उन्हें सस्पेंड किया गया है लेकिन बाकी पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उन्हें किसके इशारे पर बचाया जा रहा है। इन सवालों के जवाब भी सामने आना चाहिए। इस कत्ल की साजिश में पुलिस की मिलीभगत का अंदाजा इससे भी होता है कि इस मामले में चार मुकदमे दर्ज हुए हैं। पहला मुकदमा मकतूल नन्हे यादव के भाई फूलचन्द ने दर्ज कराया है, दूसरा मुकदमा सुरेश यादव की मौत के मामले में पवन कुमार ने दर्ज कराया है। तीसरा मुकदमा हथिगवां थाने के एसओ मनोज कुमार शुक्ला ने दर्ज कराया है जिसमें नन्हे यादव के भाई फूलचन्द को भी मुल्जिम बना दिया है चैथा मुकदमा सीओ जियाउल हक की बीवी परवीन आजाद ने दर्ज कराया है जिसमें राजा भैया समेत गुलशन राय, गुड्डू सिंह और राजीव सिंह वगैरह को नामजद कराया है। पुलिस ने गुड्डू सिंह और राजीव सिंह को गिरफ्तार भी कर लिया है। लेकिन पुलिस के आला अफसरान का यह कहना कि अगर सीओ जियाउल हक को छोड़कर भागने वाले पुलिस वाले बुजदिली के मुल्जिम पाए जाएंगे तो उन्हें बर्खास्त किया जा सकता है किसी की समझ में नहीं आ रहा है। यह बात तो सूरज की रौशनी की तरह जाहिर है कि जियाउल हक को उनके साथी तमाम पुलिस वाले छोड़कर भाग गए थे तो अब इसमें जांच क्या होगी? उन्हें तो पहले ही बर्खास्त कर देना चाहिए था। इसके अलावा जब मकतूल प्रधान और उनके भाई के साथ सीओ जियाउल हक की बीवी ने मुकदमा दर्ज करा दिया था तो फिर हथिगवां के एसओ मनोज शुक्ला ने अलग से एक मुकदमा क्यों दर्ज कराया और उसमें मकतूल प्रधान के भाई फूलचंद का नाम मुल्जिमीन में क्यों लिखा? इससे तो यह पता चलता है कि पुलिस यह साबित करना चाहती है कि मकतूल प्रधान नन्हे यादव के हामी हंगामा कर रहे थे जिसकी खबर पाकर पुलिस वहां पहुंची तो उन लोगों ने पुलिस वालों पर हमला कर दिया। इसमें किसी पुलिस वाले की गोली नन्हे यादव के भाई सुरेश यादव के लग गई जिससे मकतूल प्रधान की हामी भीड़ भड़क गई और उसने पुलिस वालों पर हमला बोल दिया। पिटाई के डर से सीओ जियाउल हक को छोड़कर साथी पुलिस वाले भाग गए भीड़ ने जियाउल हक की सर्विस पिस्टल छीन कर उन्हें गोली मार दी। इस तरह पुलिस का इरादा राजा भैया को बचाने और मकतूल प्रधान के घर वालों को सीओ जियाउल हक के कत्ल में फंसाने का नजर आता है। यह ख्याल इसलिए सच लगता है क्योंकि तकरीबन बहुत हद तक कुछ इसी तरह की थ्योरी राजा भैया ने अपने इस्तीफे के बाद मीडिया नुमाइंदो से बात करते हुए पेश की थी। यह सारी कडि़यां जुड़कर एक गहरी साजिश का तानाबाना बुनती नजर आती हैं। सीओ जियाउल हक के साथ गए तमाम पुलिस वालों की फोन काल्स की तफसील भी सामने आना चाहिए। खबर लिखे जाने तक सीबीआई ने इस केस को हाथ में ले लिया था मगर अहम बात यह है कि सीबीआई इस मामले की जांच कब तक मुकम्मल करती है या इसका अंजाम भी अनाज घोटाले वाला होता है?

(सौजन्य:जदीद मरकज 1016मार्च2013)

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