Posted by: Bagewafa | مارچ 25, 2013

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई बम धमाकों की सजा सुनाकर इस मामले को आखिरी मंजिल तक पहुंचा दिया!…..? हिसाम सिद्दीकी

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई बम धमाकों की सजा सुनाकर इस मामले को आखिरी मंजिल तक पहुंचा दिया!…..? हिसाम सिद्दीकी

बम धमाकों के मुल्जिमान को सजा मस्जिद तोड़कर दंगा कराने वालों का क्या?

हिसाम सिद्दीकी नई दिल्ली! बीस साल पहले मुंबई में हुए सीरियल बम धमाकों के मुल्जिमान को मुल्क की आखिरी अदालत यानि सुप्रीम कोर्ट से भी सजा मिल गई। इन मुल्जिमान में सबसे अहम अदाकार संजय दत्त है, जिन्हें बम धमाके के बजाए गैर-कानूनी तरीके से असलहा रखने के इल्जाम में पंाच साल की सजा मिली है। मुंबई की टाडा कोर्ट ने इस मामले में दस लोगों को मौत की सजा दी थी और बीस को उम्रकैद। सुप्रीम कोेर्ट ने फांसी की सजा को भी उम्र कैद में तब्दील कर दिया सिर्फ एक याकूब मेमन की फांसी की सजा बरकरार रखी। सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि याकूब मेमन बम धमाकों का असल मुजरिम है बाकी सभी लोग गरीब तबके के परेशान हाल लोग थे जिन्हें इस्तेमाल किया गया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का पूरे मुल्क ने इस्तकबाल किया, इसे एक अच्छा फैसला करार दिया। इसी के साथ समाज के कई हिस्सों खुसूसन मुसलमानों में एक नई बहस चल पड़ी है कि मुंबई के धमाके तो बाबरी मस्जिद तोड़े जाने, मुंबई और सूरत समेत मुल्क के कई शहरों में इंतहाई भयानक किस्म के फिरकावाराना फसादात के रद्देअमल (प्रतिक्रिया) में हुए थे। पाकिस्तान में बैठी हिन्दुस्तान मुखालिफ ताकतों ने दंगों और मस्जिद तोड़ने के बहाने कुछ नौजवानों को फंसा कर यह हरकत करवाई थी। इस हरकत में नामजद मुल्जिमान का मुकदमा तो आखिरी मंजिल तक पहुंच गया, लेकिन बाबरी मस्जिद तोड़कर और मुल्क को दंगो की आग में झोंक कर बम धमाकों का माहौल पैदा करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। दिल्ली में एक लड़की की आबरूरेजी जैसे शर्मनाक वाक्ए पर एक सुप्रीम कोर्ट सो-मोटो नोटिस ले सकता है तो मस्जिद तोड़ने वालों और उसके बाद दंगे कराकर बम धमाके का माहौल बनाने वालों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट सो-मोटो नोटिस क्यों नहीं ले रहा है। दंगो में बाल ठाकरे के शिवसैनिकों के नाम पर उनके गुण्डों की फौज और मुंबई पुलिस के कुछ फिरकापरस्त जेहन पुलिस वालों ने मिलकर दंगों के बहाने मुंबई के मुसलमानों पर न सिर्फ हर तरह के जुल्म ढाए थे बल्कि निहत्थे मुसलमानों का कत्लेआम भी कराया था। यह बात जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा ने अपनी तहकीकाती रिपोर्ट में कही है। श्रीकृष्णा भी हाईकोर्ट के जज थे उनकी रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई ना करके हमारा मुल्क और मुल्क की सरकार मुसलमानों और पूरी दुनिया को क्या मैसेेज देना चाहती है? सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पाकिस्तान को भी आईना दिखाते हुए कहा है कि पाकिस्तान यूनाइटेड नेशन्स का मेम्बर है, इसके बावजूद उसने पड़ोसियों के साथ हुस्ने सुलूक और अम्नो अमान के साथ रहना नहीं सीखा। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने मुंबई के कुछ नौजवानों को फर्जी पासपोर्ट फराहम कराए, फिर उन्हें दुबई और पाकिस्तान ले जाकर खतरनाक असलहे चलाने की टेªनिंग दी। किसी भी मुल्क की सरकारी एजेंसी के लिए इस तरह के काम इंतेहा दर्जे तक काबिले एतराज और काबिले मजम्मत हैं। संजय दत्त को सजा मिलने के बाद जब पूरे मुल्क में यह बहस चल रही थी कि अगर उन्हें जेल जाना पड़ गया तो उन आद्दा दर्जन फिल्मों का क्या होगा जिनमें संजय दत्त काम कर रहे हैं और जिनमें तकरीबन ढाई सौ करोड़ रूपये लगे हैं। इसी बहस के दरमियान सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज और प्रेस कौंसिल आफ इंडिया के चेयरमैन जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने महाराष्ट्र के गवर्नर को खत लिखकर अपील कर दी कि उन्हें संजय दत्त को माफ कर देना चाहिए। अपने खत में उन्होंने गवर्नर को लिखा है कि संजय दत्त के कुन्बे का देश के लिए जो तआवुन (योगदान) रहा है उसे देखते हुए संजय दत्त को माफी देना इंसाफ के मुताबिक होगा। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई पुलिस, वहां की खुफिया एजेंसी, कस्टम मोहकमा और समन्दरी सरहदों की हिफाजत करने के लिए तैनात कोस्ट गाडर््स के किरदार को भी मुश्तबा (संदिग्ध) करार दिया है। अदालत ने कहा कि इन मोहकमों के अफसरान और वर्कर्स ने सिर्फ लापरवाई ही नहीं बरती बल्कि इनकी मिलीभगत भी साफ दिखती है। अगर इन मोहकमों के लोगो ने दहशतगर्दों के साथ मिलीभगत ना की होती तो यह मुमकिन ही नहीं था कि इतनी बड़ी मिकदार (मात्रा) में गोला बारूद और आरडीएक्स मुंबई पहुंचा जाता। ना ही इतनी बड़ी तादाद में असलहा आ सकता था। अदालत ने कहा कि इन मोहकमों के कुछ लोगों ने सिर्फ लापरवाई ही नहीं की बल्कि वह भी पूरी तरह दहशतगर्दों से मिल गए और रिश्वत खाकर उनका साथ दिया। मुंबई की टाडा कोर्ट ने इस मामले में जिन ग्यारह लोगों को फांसी की सजा दी थी, उनकी सजा सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए उम्रकैद में तब्दील कर दी कि इनमें से एक याकूब मेमन तो बम धमाकों का असल मुजरिम है बाकी गरीब लोग हैं जिन्हंे लालच देकर या किसी और तरीके से इस मामले में फंसाया गया था। याकूब मेमन ही इसका मास्टर माइंड था इसलिए उसकी फांसी की सजा कम नहीं की जा सकती। याकूब मेमन ने ही बम धमाकों की साजिश रची और उसी ने असलहा और पैसे फराहम कराए। जिन बीस मुल्जिमान को टाडा अदालत ने उम्रकैद की सजा दी थी उनमें एक खातून एचआईवी पाजीटिव पाई गई, एक की सजा मुकम्मल हो चुकी है और एक की सजा कम करके सुप्रीम कोर्ट ने दस साल कर दी, बाकी सत्रह की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। इनमें ईसा मेमन, यूसुफ मेमन, रूबीना मेमन, नसीम बरमरे, अब्दुल गफूर पाटकर, विजय पाटिल, इम्तियाज घवाटे, मुईन कुरैशी, बशीर खैरूल्लाह और दाऊद फनसे भी शामिल है। संजय दत्त को टाडा अदालत ने ही बम धमाकों की साजिश से बरी कर दिया था लेकिन उन पर असलहा एक्ट लगाकर उन्हें छः साल की सजा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने संजय दत्त की सजा एक साल कम करके पांच साल कर दी लेकिन उन्हें प्रोबेशन देने से मना कर दिया। अदालत ने कहा कि यह एक इंतहाई संगीन मामला है इसलिए संजय दत्त को छूट नहीं दी जा सकती। उन्हें हुक्म दिया गया है कि चार हफ्ते बाद वह खुद को अदालत के हवाले कर दें। संजय दत्त को जब सजा सुनाई गई तो उनकी बहन लोकसभा मेम्बर प्रिया दत्त अदालत के कमरे में मौजूद थी सजा सुनते ही उनके आंसू निकल पड़े। अब संजय दत्त को साढ़े तीन साल तक जेल में रहना होगा। संजय दत्त के वकील सतीश मानशिंदे और मजीद मेनन ने कहा है कि फैसले को तफसील से पढ़ने के बाद वह लोग रिव्यू पटीशन दाखिल करने की कोशिश करेंगे। मजीद मेनन अगरचे संजय दत्त के वकीलों की टीम में शामिल नहीं है फिर भी उन्होंने कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले की बारीकी से स्टडी की है। संजय दत्त के सामने सजा भुगतने के अलावा दूसरा रास्ता बहुत मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच इस फैसले के खिलाफ रिव्यू मंजूर करेगी या नहीं फिलहाल यह कह पाना बहुत मुश्किल है। लेकिन पूरी तरह नाउम्मीद भी नहीं होना चाहिए बड़ी अदालत उन पर रहम भी कर सकती है। संजय दत्त को सुप्रीम कोर्ट के जरिए सजा सुनाए जाने से फिल्म इंडस्ट्री के उन प्रोड्यूसर्स-डायरेक्टरों को तगड़ा झटका लगा है जिन्होंने संजय दत्त पर करोड़ो रूपया लगा रखा था। एक अंदाजे के मुताबिक बताया जा रहा है कि संजय दत्त के जेल में जाने से फिल्म इंडस्ट्री को तकरीबन साढ़े तीन सौ करोड़ का घाटा होगा। जंजीर फिल्म के रिमेक में प्राण का किरदार निभा रहे संजय दत्त की उंगली, शेर, घनचक्कर और पुलिसगीरी जैसी फिल्में तकरीबन तैयार है इनमें संजय दत्त का थोड़ा काम रह गया है। जो उनके जेल जाने से अटक जाएगा। इसके अलावा फ्राड और चमेली के अलावा पीके और मुन्ना भाई सीरीज की तीसरी फिल्म ‘‘मुन्ना भाई चले दिल्ली’’ की भी खासी शूटिंग हो चुकी है इन्हें अगले साल रिलीज होना था। लेकिन संजय दत्त के जेल जाने से इन फिल्मों के अटकने का खतरा पैदा हो गया है। इस वजह से उन लोगों को सैकड़ों करोड़ का घाटा होने का खदशा बढ़ गया है जिनकी फिल्मों में संजय दत्त काम कर रहे हैं। इन लोगो को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच से ही आखिरी उम्मीद है। अगर संजय दत्त की रिव्यू पटीशन मंजूर हो जाती है तो मुमकिन है कि संजय दत्त को जेल से ही फिल्में पूरी करने जाने की इजाजत मिल जाए। अब आगे क्या होगा इसका पता तो किसी को नहीं है मगर मुंबई फसादात के जिम्मेदारों को सजा ना होेना और बम धमाकों के इल्जाम से बरी होने के बाद महज आम्र्स एक्ट के तहत संजय दत्त को सजा होने से इंसाफ पसंद शहरियों में यह सवाल पूछा जा रहा है कि मंुबई फसादात के मुल्जिमान को सजा कब होगी? संजय दत्त को सजा मिलने की खबर फैलते ही फिल्मी दुनिया की तमाम हस्तियां एक जुट हो गईं। सबने संजय दत्त को सजा दिए जाने पर अफसोस जाहिर किया। हालांकि कुछ लोगों का कहना था कि संजय ने गैर-कानूनी असलहा रख कर गलती जरूर की मगर उसे उसकी गलती की सजा मिल चुकी है। जबकि लोकसभा मेम्बर और अदाकारा जयाप्रदा समेत फिल्मी दुनिया के कई लोगों का कहना है कि इस उम्र में भी संजय दत्त का बर्ताव बिल्कुल बच्चों जैसा रहता है। उसका बचपना अभी खत्म नहीं हुआ है इसीलिए सब उन्हें अभी संजू बाबा कह कर बुलाते हैं। इनके जैसे संजय दत्त के फिल्मी दुनिया के दोस्तों का मानना है कि संजय दत्त ने जिन्दगी में बड़ी परेशानियां उठाई हैं, वह अपनी मां नर्गिस दत्त से बेहद प्यार करते थे मगर कैंसर से हुई मौत ने संजय को तोड़ दिया था। सुनील दत्त ने संजय दत्त पर करोड़ों रूपया खर्च करके उसे नशे की लानत से छुटकारा दिलाया औरसंजयदत्त ने ‘नाम’ फिल्म से वापसी की, बालीवुड को एक बागी हीरो मिल गया। इसके बाद अमरीका से तलाश कर लाए देवानंद की हीरोइन ऋचा शर्मा से संजय दत्त का इश्क फिर शादी हुई मगर ऋचा भी कैंसर का शिकार होकर दुनिया से गुजर गईं। संजय दत्त को करीब से जानने वालों का कहना है कि संजय अपने घर वालों को बहुत मोहब्बत करता था और मां नर्गिस दत्त की मौत के बाद वह जेहनी तौर पर काफी परेशान रहता था। जब मुंबई में बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद फसाद हुए तो उसे यह डर लगने लगा कि कहीं फिरकापरस्त अनासिर उसके घर वालों को अपना निशाना ना बना लें क्योंकि उस दौरान उनके वालिद सुनील दत्त ने मुसलमानोंकी बहुत मदद की थी। लिहाजा अपने घर वालों की खुद हिफाजत करने के बचकाना ख्याल ने उससे वह गलती करा दी जिसकी वजह से अब उसका पूरा कैरियर ही खतरे में पड़ गया है। संजय दत्त आज उम्र के जिस पड़ाव पर है वहां साढ़े तीन साल की सजा भी कम नहीं होगी। वैसे संजय के दोस्त और चाहने वाले दुआ कर रहे हैं कि अगर बड़ी अदालत उनकी रिव्यू पटीशन को मंजूर करके उन पर रहम कर दे तो बहुत अच्छा होगा।

http://www.jadeedmarkaz.net/special_report_hindi.htm

Advertisements

زمرے

%d bloggers like this: