Posted by: Bagewafa | اپریل 4, 2013

लोकायुक्त: ‘मोदी के दावों पर सवालिया निशान’ ….योगेन्द्र यादव

लोकायुक्त: मोदी के दावों पर सवालिया निशान

योगेन्द्र यादव

राजनीतिक विश्लेषक

 बुधवार, 3 अप्रैल, 2013 को 14:16 IST तक के समाचार

 

पिछले वर्ष अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में हज़ारों लोगों ने जनलोकपाल की मांग के लिए आंदोलन किया था.

गुजरात में जो लोकायुक्त विधेयक पेश किया गया है वो लोकपाल के नाम पर भद्दा मज़ाक है. ये व्यवस्था तो आज की व्यवस्था से भी खराब है.

वर्तमान व्यवस्था में भी बड़े अधिकारियों से अनुमति लेकर भ्रष्टाचारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो सकती है.लेकिन मोदी सरकार ने जो किया है वो बस इतना है कि आज की तारीख में जो विजिलेंस कमिश्नर है उसका नाम बदल कर लोकायुक्त कर दिया गया है.

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इससे भाजपा के दावों पर सवालिया निशान लगता है, मोदी के दावों पर सवालिया निशान लगता है कि वो स्वच्छ बेदाग प्रशासन चलाना चाहते हैं. प्रधानमंत्री की तरह हो सकता है कि मोदी की छवि साफ हो लेकिन प्रधानमंत्री की ही तरह उनकी मंशा पर सवाल उठता है कि वो कैसा प्रशासन चलाना चाहते हैं.

"जहां तक मोदी सरकार की बात है तो आपको ये याद रखना चाहिए कि आम आदमी पार्टी ने मोदी और अदानी ग्रुप के साथ संबंधों के बारे में लोगों को बताया था भले ही मीडिया ने उस पर ज्यादा रिपोर्टिंग नहीं की.”

जब लोकपाल आंदोलन चल रहा था तब उत्तराखंड सरकार ने लोकायुक्त अपनाया था. उस समय खंडूरी ईमानदार होने की कोशिश में थे तो जनलोकपाल जैसा मसौदा लागू किया था. लेकिन भाजपा को कितनी रुचि है लोकपाल में वो संसद में लोगों को दिखा था.

जहां तक मोदी सरकार की बात है तो आपको ये याद रखना चाहिए कि आम आदमी पार्टी ने मोदी और अदानी ग्रुप के साथ संबंधों के बारे में लोगों को बताया था भले ही मीडिया ने उस पर ज्यादा रिपोर्टिंग नहीं की.

जहां तक आम आदमी पार्टी को भाजपा या संघ के छद्म समर्थन की बात है तो मुद्दा ये है कि जब अन्ना आंदोलन चल रहा था तो हर तरह के लोग आए थे समर्थन के लिए. माले के लोग भी थे. संघ के लोग भी आए होंगे. उस समय ये शक समझ में आ सकता था कुछ प्रतीकों की वजह से संदेह बढ़ा भी होगा.

लेकिन अब हमारी पार्टी ने अपना मत स्पष्ट किया है सेकुलर भारत को लेकर. इसके बावजूद विभ्रम की स्थिति है तो हम ये ही कह सकते हैं कि लोगों को स्थिति स्पष्ट नहीं है. हम आने वाले दिनों में और स्पष्ट करेंगे

गुजरात में भी हम लोकायुक्त के मुद्दे पर विरोध कर रहे हैं. हां ये बात ज़रुर है कि पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक बिजली पानी के मुद्दे पर अनशन कर रहे हैं. अब ये अपेक्षा तो नहीं होनी चाहिए कि ये आंदोलन बीच में छोड़ कर हम गुज़रात चले जाएं.

लोकपाल को लेकर बीजेपी और कांग्रेस का स्टैंड एक ही जैसा है जो संसद में दिखा है.

गुजरात के लोकायुक्त की व्यवस्था में तो मीडिया पर भी पाबंदी लगाई गई है कि रिपोर्टिंग नहीं हो सकती. सरकार ने भी जब अपना लोकपाल पेश किया था तो उसमें शिकायत करने वाले पर जुर्माने की व्यवस्था थी. तो समझना मुश्किल है कि ये लोग आखिर चाहते क्या हैं.

(योगेंद्र यादव आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए हैं और यह लेख बीबीसी संवाददाता सुशील झा के साथ बातचीत पर आधारित है)

 

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