Posted by: Bagewafa | اپریل 25, 2013

कौन हूँ मैं ? सैयद शबनम, देवास

कौन हूँ मैं ? सैयद शबनम, देवास


 

मुझसे पुछा किसी ने

? कौन हूँ   मैं 

चहक कर कहा कि,

।मैं, फलॉं की बेटी, उनका ख्वाब, घर की लक्ष्मी हूँ

मैं बढ़ती रही 

।और एक दिन मैं बड़ी हो गई

बिना कुछ पुछे मैने

अपनी पहली पहचान बदली

फिर किसी ने वही सवाल पूछा

घमंड से कहा मैने

।उसके घर की इज्ज़त, उसके वंश  को बढ़ाने वाली बेल हूँ  मैं

।।फिर चुपचाप मैं बढ़ती गई

?किसी ने फिर से पूछा कि  कौन हूँ मैं

।।मैने इतराकर कहा इन पंछियों की मॉं

मैं बढ़ती गई हमेशा की तरह 

आज फिर किसी ने  एक बार और पूछा

? कौन हूँ  मैं 

खामोश हूं और निरूत्तर हूँ 

!आज भी प्रश्नचिन्ह है, पहचान पर मेरी

ख्वाब कब किसी की इज्जत बनी, इज्ज़त इतराने लगी,

इतराते हुए कब घोंसला खाली हुआ

और आज फिर मैं अपनी पहचान ढूंढने चली 

 

 


زمرے

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