Posted by: Bagewafa | جولائی 22, 2013

मोदी के सरदार ‘पटेल‌‌‌‌‌‌‌‌‌ ‌‌‌‌……..समीर चौंगावकर

मोदी के सरदार पटेल‘…By समीर चौंगावकर 24/06/2013 14:10:00

 

इन दिनोंगुजरात के मुख्यमंत्री अपने सरदार प्रेम के कारण चर्चा में हैं। हाल मेंही 11 जून को उन्होंने घोषणा की थी कि वे गुजरात के गौरव सरदार पटेल कीस्टेचू आफ लिबर्टी से भी बड़ी प्रतिमा स्टैचू आफ यूनिटी की स्थापना के लिएपूरे देश के किसानों से लोहा जुटायेंगे। उनका यह स्टैचू आफ यूनिटीप्रोग्राम सरदार पटेल की जयंती 31 अक्टूबर से शुरू होगा। लेकिन मोदी सिर्फसरदार की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाने की बात ही नहीं कर रहे हैं। अब वे अपनीसभाओं में सरदार पटेल का नाम इस तरह से लेते हैं जैसे सरदार कांग्रेस केनहीं बल्कि संघ के स्वयंसेवक रहे हों। जबकि ऐतिहासिक सच ठीक इसके उलट है।

रविवार को पठानकोट की एक सभा में नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिरकहा है कि सरदार पटेल, डॉ अम्बेडकर और श्यामाप्रसाद मुखर्जी तीन ही व्यक्तिऐसे थे जो जवाहर लाल नेहरू के सामने सीना तान कर खड़े रहते थे। इन तीनोंके जाने के बाद से नेहरू निरंकुश हो गए। नरेन्द्र मोदी असत्य बोल रहे हैं।हकीकत यह है कि नेहरू निरंकुश कभी नही रहे। जवाहर लाल नेहरू धर्मनिरपेक्षऔर प्रजातात्रिक थे। जिस ऐतिहासिक सत्य को मोदी छुपा रहे है वह यह है कि 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लगापहला प्रंतिबध नेहरू ने नहीं, सरदार पटेल ने लगाया था।

गांधी जी की हत्या के बाद संघ के दूसरे सरसंघचालक गुरू गोलवलकर को नेहरूने नहीं, पटेल ने जेल भेजा था। नेहरू संघ पर प्रंतिबंध लगाने के बादसन्तुष्ट हो गए थे। वे इससे ज्यादा कुछ करना नहीं चाहते थे। लेकिन वह सरदारपटेल थे जिन्होने कहा था कि बस अब बहुत हो चुका, संघ को अब छुट्टे सांड़की तरह समाज में खुला नही छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा था नकेल कसनीहोगी।‘ 27 फरवरी 1948 को नेहरू को लिखी चिट्ठी में साफ कहा था कि इन सबकेपीछे हिन्दूमहासभा और संघ की साजिश है। आज भले ही नरेन्द्र मोदी एक सांसमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी और सरदार पटेल का नाम ले रहे हों लेकिन उस वक्त 18 जुलाई 1948 को सरदार पटेल द्वारा श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखी चिट्ठीमें साफ कहा था कि वे गांधी जी की हत्या के संबंध में कुछ नहीं कहना चाहतेक्योंकि मामले की जांच हो रही है लेकिन सरदार पटेल ने हिन्दू महासभा औरआरएसएस के बारे में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखा था कि उनके दिमाग मेंइस बात को लेकर कोई संदेह नहीं है कि आरएसएस का अस्तित्व सरकार और देशदोनों के लिए खतरा पैदा कर रहा है।

संघ पर प्रतिबंध और गुरू गोलवरकर की गिरफ्तारी के बाद उस वक्त सरदारपटेल ने संघ से कहा था कि संघ से प्रतिबंध तभी हटेगा और गुरू गोलवलकर तभीजेल से बाहर आएगे जब संघ अपना लिखित संविधान बनाकर हिंसा का त्याग, गोपनीयता का त्याग और देश के संविधान पर पूरी आस्था रखने की बात स्वीकारकरेगा। सरदार पटेल के प्रस्ताव पर गुरू गोलवलकर ने वचन दिया कि जेल से आकरवे संघ का संविधान बनाएगे। उस वक्त गुरू गोलवरकर वर्तमान मध्य प्रदेश कीशिवनी जेल में थे। गोलवरकर के आश्वासन से सरदार पटेल नही मानें। सरदार पटेलने कहा पहले संघ का संविधान आएगा फिर गुरू गोलवलकर जेल से बाहर आएगे।गोलवलकर झुके। शिवनी जेल में ही संघ का संविधान बना। शिवनी जेल से ही गुरूगोलवलकर ने संघ के संविधान को अंतिम रूप दिया और जेल से ही अपने हस्ताक्षरकरके सरदार पटेल के पास भेजा। सरदार पटेल ने ध्यान से पूरा संविधान पढा औरजब सन्तुष्ट हो गए कि अब संघ के गले मे घंटी बंध गई है तब जाकर संघ सेप्रतिबंध हटा और गुरू गोलवलकर बाहर आए।

लेकिन अब इसी संघ परिवार के कट्टर हिन्दूवादी स्वंयसेवक नरेन्द्र मोदीसार्वजनिक मंचो से सरदार पटेल की तारीफ करते नही थकते। स्टेचू आफॅलिबर्टीसे बड़ी मुर्ति सरदार पटेल की गुजरात में बनाने जा रहे है। मोदीअपने 12 साल के मुख्यमंत्रित्व काल मे 100 से ज्यादा बार सरदार पटेल कीप्रंशसा कर चुके है, लेकिन एक बार भी हेडगेवार और गुरू गोलवलकर का नामसार्वजनिक मंच से नही लिया। सरदार पटेल तो कभी संघ मे रहे नहीं। सारीजिंदगी कांग्रेस मे थे और कांग्रेस के अंदर गांधी के दक्षिणपंथी गुट कानेतत्व करते थे। क्या नरेन्द्र मोदी बताएंगे कि उन्हे सरदार पटेल की छवि कोकांग्रेस से उधार लेने की जरूरत उन्हें क्यों पड़ी? वह शायद इसलिए किगुजरात में वोट पाने के लिए पटेल होना जरूरी होता है। हेडगेवार और गुरूगोलवलकर गुजरात में वोट नही दिला सकते। अब आप ही बताएं क्या यह निरा वोट कीराजनीति नहीं है?

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