Posted by: Bagewafa | جولائی 27, 2013

1993 जैसे हालात पैदा कर रहे हैं मोदी….हिसाम सिद्दीकी(जदीद मरकज)

बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद सूरत और मुंबई के मुस्लिम मुखालिफ दंगो के नतीजे में हुए थे सीरियल बम धमाके

1993 जैसे हालात पैदा कर रहे हैं मोदी….हिसाम सिद्दीकी(जदीद मरकज)

ई दिल्ली! गुजरात में मारे गए मुसलमानों की मिसाल कुत्ते के बच्चे से देने फिर कांग्रेस पर हमला करने के लिए बुर्के का इस्तेमाल और बार-बार यह कहना कि दो हजार दो में गुजरात में मुसलमानों का जो कत्लेआम संघ गरोह ने किया था उस पर कोई अफसोस नहीं है। गुजरात के वजीर-ए-आला नरेन्द्र मोदी मुल्क में ठीक वैसा ही माहौल पैदा कर रहे हैं जैसा माहौल उनके संघ गरोह ने 1992 के आखिर में बाबरी मस्जिद तोड़ने के बाद सूरत और मुंबई में बड़े पैमाने पर मुस्लिम मुखालिफ फसादात करा पैदा किया था। उन्हीं हालात की वजह से पाकिस्तान में बैठी हिन्दुस्तान मुखालिफ ताकतें मुंबई में सीरियल बम धमाके कराने में कामयाब हुई थीं। तभी से पूरे मुल्क में दहशतगर्दी का जो सिलसिला शुरू हुआ था, आज तक मुल्क उसी में फंसा हुआ है। बम धमाके हो या दहशतगर्दी के दीगर वाक्यात नरेन्द्र मोदी और उनके संघ गरोह के बड़बोलो पर तो उसका कोई असर पड़ता नहीं है। इनके बनाए हुए माहौल का शिकार आम गरीब अवाम ही होते हैं। यह एक तल्ख हकीकत है कि 1972 में बांग्लादेश बनने के बाद से ही पाकिस्तान इस कोशिश में था कि उसके बम और असलहे थामने वाले हाथ उसे हिन्दुस्तान में मिल जाएं, बीस साल की कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान को उसके बम और असलहे थामने वाले दो हाथ भी पूरे हिन्दुस्तान में नहीं मिले थे। 1992 में बाबरी मस्जिद तोड़ने के बाद संघ गरोह ने सूरत और मुंबई में दंगों के बहाने जो मजालिम ढाए उनका फायदा पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने उठाया फिर तो उन्हें उनके फराहम किए हुए बम और हथियार थामने वाले दो चार नहीं सैकड़ों हाथ मुंबई और महाराष्ट्र से ही मिल गए थे। मार्च 1993 में पाकिस्तान ने उन्हीं हाथों से मंुबई में सीरियल बम धमाके करा कर हिन्दुस्तान में दहशतगर्दी की जो फसल बोई थी वह अब काफी फल फूल रही है। दहशतगर्दी मुल्क के लिए नासूर साबित हो रही है। इसके बावजूद मोदी जैसी बेलगाम जुबान रोज मुल्क में जहर घोलने का ही काम करती जा रही है। उस पर दावा यह कि वह तो राष्ट्रवादी हिन्दू हैं। जायज नाजायज किसी भी तरीके से जल्द से जल्द कूद कर मुल्क के वजीर-ए-आजम की कुर्सी तक पहुंचने के लिए उतावले नरेन्द्र मोदी झूट बोलकर अपने फेंकू किरदार से मुल्क का मुल्क के हिन्दुओं का तो नुक्सान तो कर ही रहे हैं किसी न किसी बहाने 2002 में गुजरात में हुए मुसलमानों के कत्लेआम का मामला छेड़ कर बड़ी तादाद में मुस्लिम नौजवानों को भड़काने और गुमराह करके गलत रास्ता अख्तियार करने के लिए भी मजबूर कर रहे हैं। वह इतने बड़े फिरऔन हो चुके हैं कि मारे गए हजारों मुसलमानों को कुत्ते के बच्चे के गाड़ी के नीचे आकर मरने की मिसाल देकर बेइज्जत करने का जुर्म कर रहे हैं। मोदी बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि ‘बुर्का’ मुसलमानों के लिए एक बहुत ही अहम जज्बाती मसला है। इसके बावजूद कांग्रेस से लड़ने के लिए वह जानबूझ कर मुसलमानों के जज्बात मजरूह करने की गरज से बुर्का लफ्ज का इस्तेमाल करते हैं। उन्हें कांग्रेस से सियासी लड़ाई लड़नी है तो सियासी तरीके से लड़े हर बयान में मुसलमानों और मुसलमानों से मुताल्लिक मामलात को ही बीच में क्यों लाते हैं। अब तो ऐसा लगने लगा है कि अगर मुसलमान न होते तो वह हिन्दुओं के दरम्यान ही जात पात और तबकों की बुनियाद पर जंग करा कर अपना सियासी उल्लू सीधा कर लेते। नरेन्द्र मोदी मुसलसल झूट बोल रहे हैं और ऐसी भाषा (जुबान) का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे समाज में कशीदगी पैदा हो। वह आज तक जितने इदारों में तकरीर करने गए हैं झूट का ही सहारा लिया है। पुणे के फग्र्यूसन कालेज में भी उन्होंने लफ्फाजी की सारी हदें तोड़ दी। हिन्दुस्तान के तालीमी सिस्टम को नाकारा बताते हुए वह चीन के सिलसिले में बार-बार झूट बोले जिसके जवाब में मरकजी वजीर शशि थरूर ने कहा कि चीन में तालीम पर जितना पैसा खर्चा हो रहा है उसकी तफसील वेबसाइट्स पर मौजूद है, इसके बावजूद नरेन्द्र मोदी मुसलसल झूट बोल रहे हैं तो इसका क्या इलाज है। नरेन्द्र मोदी ने अपनी तकरीर में कहा था कि चीन में सबसे ज्यादा पैसा तालीम पर खर्च होता है जबकि चीन की वेबसाइट से यह पता चलता है कि चीन अपने बजट का सिर्फ सवा तीन फीसद पैसा तालीम पर लगाता है। नरेन्द्र मोदी ने मुल्क के नौजवानों के स्पोर्टस के मैदान में पीछे रहने का ठीकरा भी कांग्रेस के सर फोड़ा था। बाद में जब उनसे यह सवाल हुआ कि वह पिछले बारह साल से गुजरात के चीफ मिनिस्टर हैं इस दौरान उन्होंने गुजरात में कितने खिलाड़ी पैदा किए तो उनके पास बंगले झाकने के अलावा कोई जवाब नहीं था। मोदी यह चाहते हैं कि वह झूट बोलकर और हिन्दुओं को गुमराह करके किसी भी तरह मुल्क की सत्ता पर कब्जा करना चाहते हैं ऐसा लगता है कि वह देश के हिन्दुओं को सिर्फ बेवकूफ समझते हैं। उनके दौर में गुजरात की कीमती जमीनें कारपोरेट घरानों के हाथों औने पौने दामों पर बिकी हैं। गुजरात की आमदनी के तमाम जराए उन्होंने थैलीशाहों को सौंप दिए अगर वह चाहते तो उन्हीं घरानों के जरिए हर खेल में गुजरात की अलग टीम खड़ी करवा देते। लेकिन उन्हें तो सिर्फ झूटी नारेबाजी करनी है, काम से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। नरेन्द्र मोदी ने फग्र्यूसन कालेज में बोलते हुए एक बार फिर मुसलमानों के जज्बात से खेलने की उस वक्त कोशिश की जब उन्होंने बुर्के और सेक्युलरिज्म दोनों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि मुल्क पर जब भी कोई परेशानी आती है तो कांग्रेस सेक्युलरिज्म का बुर्का ओढ़कर बैठ जाती है। मोदी दरअस्ल बुर्का और सेक्युलरिज्म दोनों का ही मजाक उड़ा रहे थे। वह तो अच्छा हुआ कि कांग्रेस के कई लीडरों ने उन्हें मुुंहतोड़ जवाब दिया। शशि थरूर ने कहा कि खाकी नेकर की साजिशों के मुकाबले बुर्का कहीं बेहतर चीज है क्योंकि बुर्के से एहतराम (सम्मान) और इज्जत का एहसास होता है, लेकिन खाकी नेकर से तो साजिश, फूहड़पन और घटियापन की बू आती है। उन्होंने कहा कि मोदी जैसों को ना तो बुर्के की अहमियत का एहसास है ना ही उनके दिल में बुर्के की कोई इज्जत इसीलिए वह इस किस्म की बेहूदा बातें करते हैं। मरकजी इंफार्मेशन मिनिस्टर मनीष तिवारी ने मोदी को झूटा करार देते हुए कहा कि वह झूट के जरिए सब कुछ हासिल करना चाहते हैं। उन्हें यह भी तमीज नहीं है कि बोलते वक्त दूसरों के जज्बात का ख्याल रख सकें। क्योंकि उन्हें तो सिर्फ नफरत फैलाने का काम करना है। ऐसे लोगों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा और ऐसी फासिस्ट जेहन ताकतों को नीस्त ओ नाबूद करने की जरूरत है। कांग्रेस के मीडिया डिपार्टमेंट के चीफ अजय माकन ने कहा कि बुर्के में सेक्युलरिज्म फिरकापरस्ती के नंगेपन से लाख दर्जे बेहतर है। July 14-20

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