Posted by: Bagewafa | اگست 12, 2013

कुंवर महिंद्रसिंघबेदिअहमद-ए-मुख्तार तो हैं…..~कुँवर महेंद्र सिंह बेदी "सहर”

अहमद-ए-मुख्तार तो हैं…..~कुँवर महेंद्र सिंह बेदी”सहर”

हम किसी दीन से हों क़ायल-ए-किरदार तो हैं
हम सनाखाने शहे हैदर-ए-कर्रार तो हैं
नामलेवा हैं मुहम्मद के परस्तार तो हैं
यानी मजबूर पये अहमद-ए-मुख्तार तो हैं
इश्क हो जाये किसी से कोई चारा तो नहीं
सिर्फ मुस्लिम का मुहम्मद पे इजारा तो नहीं
मेरी नज़रों तो इस्लाम मुहब्बत का है नाम,
अम्न का आशिक़ी का, मेहर-ओ-मुरव्वत का है नाम
वुसअते-ए-क़ल्ब का, इख़रास-ए-अखुव्वत का है नाम
तख्ता-ए-दार पे भी हक-ओ-सदाक़त का है नाम
मेरा इस्लाम निकोनाम है बदनाम नहीं
बात इतनी है के अब आम ये इस्लाम नहीं
तु तो हर दीनके हर दौरके इन्सानका है
कभी भी तेरी तौकीर न होने देंगे
हम सलामत है तो जमाने में इन्शा अल्लाह
तुझको एक कौम की जागीर न होने देंगे

जिंदा इस्लाम को किया तुने
हक वो बातिल दिखा दिया तुने
जी के मरना तो सबको सबको आता था
मर के जीना भी सीखा दिया तुना.

लबा पे शाहे शहीदां जबतेरा नाम आता है
सामने साकी ए कौसर लिये जाम आता है

मुझको तेरी गुलामीका शरफ दे दीज्यो
खोटा सिक्काभी तो कभी काम आताहै


زمرے

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