Posted by: Bagewafa | ستمبر 20, 2013

ग़ुलज़ार करो हिन्द फिर उजड़े दयार से”… प्रोफ़ेसर देवेन्द्र मिश्र.

ग़ुलज़ार करो हिन्द फिर उजड़े दयार से”… प्रोफ़ेसर देवेन्द्र मिश्र.

       

 

किसने बिछाये कांटे शांति की राह में।

हैं कौन ऐसे वहशी दरिंदे समाज में॥

सन्नाटा मरघटों सा ,हर ओर गांव में।

कितने समाये दर्द मुफलिसों की आह में॥

हो हिन्दू या मुसलमां, सिख हो या ईसाई।

है एक रब सबों का कबीरा की दुहाई॥

नानक ने यही पाठ था दुनिया को पढाया।

हैं राम और रहीम इक गांधी ने बताया॥

नफ़रत के अंधेरों ने मगर आज है घेरा।

हर दिल में लग गया है शैतान का डेरा॥

है अर्ज़ बस मेरी यही परवरदिगार से।

ग़ुलज़ार करो हिन्द को उजड़े दयार से॥

 

प्रोफ़ेसर देवेन्द्र मिश्र

सितम्बर 18,2013

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