Posted by: Bagewafa | اکتوبر 8, 2013

तुम्हें याद हो हो कि ना याद हो …. मोमिन ख़ां मोमिन

तुम्हें याद हो हो कि ना याद हो …. मोमिन ख़ां मोमिन

 

वो जो हम में तुम में क़रार था , तुम्हें याद हो कि ना याद हो

वही यानी वाअदा निबाह का , तुम्हें याद हो कि ना याद हो

 

वो जो लुतफ़ मुझ पे थे पेशतर, वो करम कि था मेरे हाल पर

मुझे सब याद है ज़रा ज़रा , तुम्हें याद हो कि ना याद हो

 

कभी बैठे जो सब में रूबरू , तो इशारों ही में गुफ़्तगु

वो बयान शौक़ का बरमला , तुम्हें याद हो कि ना याद हो

 

हुए इत्तिफ़ाक़ से गिर बहम , तो वफ़ा जताने को दम बह दम

गला मलामत-ए-अक़रबा-ए-, तुम्हें याद हो कि ना याद हो

 

कोई ऐसी बात हुई अगर कि तुम्हारे जी को बरी लगी

तो बयां से पहले ही भूलना ,तुम्हें याद हो कि ना याद हो

 

कभी हम में तुम में भी चाह थी , कभी हम में तुम में भी राह थी

कभी हम भी तुम भी थे आश्ना , तुम्हें याद हो कि ना याद हो

 

जिसे आप गिनते थे आश्ना , जिसे आप कहते थे बावफ़ा

में वही हूँ मोमिन-ए-मुबतला , तुम्हें याद हो कि ना याद हो

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زمرے

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