Posted by: Bagewafa | دسمبر 29, 2013

व्यंग-हास्य…. राष्ट्रिय सहारा –हिन्दी

व्यंग-हास्य…. राष्ट्रिय सहारा –हिन्दी

 

एक दिन सुल्तान औरशेख चिल्ली शिकार खेलते- खेलते जंगल में चले गए। दोपहर के समय एक झील सेकुछ दूर पेड़ों की घनी छांव में वे आराम करने लगे। घोड़ों को पानी दिखाआओ।सुल्तान ने शेख चिल्ली से कहा। शेख घोड़ों को लेकर चल दिए। घोड़ों कोझील पर ले जाकर शेख ने पानी दूर से ही दिखाया और वापस ले आये। घोड़े प्यासेही रह गए। प्यासे घोड़ों की ओर देखकर सुल्तान ने कहा, ‘इन्हें पानी नहींपिलाया?’

नहीं

क्यों?’

आपका आदेश था कि घोड़ों को पानी दिखाना है, इसलिए दिखा लाया हूं। पिलाने का हुक्म नहीं मिला था।

तुम महामूर्ख हो सेनापति शेख चिल्ली।कहकर सुल्तान हंस पड़े और हंसकरबोले, ‘तुम युद्ध कौशल में जितने आगे हो, तुम्हारा व्यावहारिक ज्ञान उतनाही कम है।

मेरी हाजिरजवाबी को मूर्खता समझते हैं आप, यह आपकानजरिया है। मैं क्या कह सकता हूं?’ ‘अब तो पानी पिला लाओ।सुल्तान नेमुस्कुराते हुए कहा। पिलाने को अब कहा है।

समझ का फेर है वरनाअक्लमंद आदमी एक काम बताने पर दो करते हैं।’ ‘एक बताने पर दो?’ ‘हां! अगरमैंने पानी दिखाने के लिए कहा था तो पानी पिला भी लाना चाहिए था।’ ‘आइन्दामैं एक काम बताने पर दो काम करूंगा।

जाओ, अब पानी पिला लाओ, घोड़ेप्यासे होंगे।शेख पानी पिला लाये। बहुत दिनों बाद एक दिन सुल्तान कीबेगम बीमार हो गयीं। सुल्तान के पास थे शेख चिल्ली, क्योंकि उनकी सुल्तानसे अच्छी मित्रता हो गयी थी। हर वक्त वे साथ ही रहने लगे थे। सुल्तान शेखसे बोले, ‘बेगम बीमार हैं, एक अच्छा-सा वैद्य या हकीम बुलवाओ, जल्दी से भेजदो किसी को।’ ‘अभी लीजिये।शेख ने कहा। शेख चिल्ली ने तीन नौकर बुलवाए औरउन्हें अलग ले जाकर कुछ समझाया। नौकर चले गए। कुछ देर बाद वैद्यजी भी आगए। उन्होंने नाड़ी देखनी शुरू की ही थी कि कफन लेकर एक नौकर आ गया औरतीसरा कब्र खोदने वालों को ले आया। यह सब क्या है ?’ सुल्तान क्रोधित होतेहुए बोले। सेनापति बहादुर चिल्ली साहब के आदेश से कफन लाया हूं।एकबोला। चिल्ली बहादुर ने मुझे आदेश दिया था कि कब्र खोदने वाले को बुलालाऊं। नाप लेने आये हैं ये मुर्दे का।

कमबख्त! यहां शेख चिल्ली का बाप नहीं मरा है।

गुस्ताखी माफ हो हुजूर!आगे आकर शेख चिल्ली बोले- मेरा बाप तो बहुतपहले ही मर गया था, बेचारा स्वर्ग में है। अब रही बात बेगम साहिबा की, तोजैसा आपने एक बार कहा था की हर बुद्धिमान आदमी एक काम बताने पर दो करता है, आगे तक की सोचता है । यह सोचकर हमने वैद्यजी भी बुला लिए हैं। कफन भीमंगवा दिया और कब्र खोदने वाले भी आ गए हैं। हमने आगे की सोची है। आपने एककाम बताया था, हमने तीन कर दिए हैं, फिर बात यह है कि खुदा न खस्ता बेगम कोकुछ भी हो सकता है?’

सुल्तान चुप हो गए। शेख चिल्ली के जवाब अनूठे थे। सुल्तान समझ गए थे कि शेख चिल्ली को हराना असंभव है।

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