Posted by: Bagewafa | جنوری 2, 2014

बीते बरस की बीती बाते।…… प्रोफ़ेसर देवेन्द्र मिश्र

बीते बरस की बीती बाते।…… प्रोफ़ेसर देवेन्द्र मिश्र

 

बीते बरस की बीती बाते।

खट्टी मीठी हैं कुछ यादे।।

बिछड़ गये कुछ मीत हमारे॥

कुछ हैं अधूरे गीत तुम्हारे॥

लेकिन ये होता रहता है।

काल चक्र किसकी सुनता है॥

इसमें उलझ कर समय न खोना।

कदम बढाकर चलते रहना॥

रूका, थका जो, वो ही हारा।

चलें  अनवरत ध्येय हमारा॥

आशायें भविष्य की मंगल।

सुख समृद्धि की सरिता कल कल्॥

नव विश्वास  हो नयी उमंगें।

गीत नये हों नयी तरंगें॥

मृत्युंजय की भांति सोचना।

हर पल, हर क्षण को तुम जीना॥

जो भी हुआ चिंता मत करना।

कायर बन हर दिन मत मरना॥

निडर रहा उसने सुख भोगा।

जो होगा अच्छा ही होगा॥

हर्ष भरा हो वर्ष हमारा।

अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा॥

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प्रोफ़ेसर देवेन्द्र मिश्र

टोरोंटो,कनाडा

devendramisra@hotmail.com

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