Posted by: Bagewafa | جنوری 6, 2014

एक दुआ हो जायेगी….मुहम्मदअली वफा

एक दुआ हो जायेगी….मुहम्मदअली वफा

खारसे भी बागमें  मुमकिन वफा हो जायेगी

फूलकी नजरें अगर  हमसे खफा  हो जायेगी


मोड डो या तोड लो हमतो महेकेंगे सदा

फूल से ख़ुशबू भला कैसे जुदा हो जायेगी

 

गर्विदा हम तो रहे  हर हालमें  दिदार के

आपका आना यहां पर  एक दुआ हो जायेगी

 

तुम वफाकी जान बन कर देखलो इस आंखमें

ये नजर दिलका हमेशा आइना हो जायेगी

 

निकलते  नहि आंखसे ये-आंखमें आकर वफा

दर्दकी ये तो यकीनन  इंतेहा हो जायेगी

 

है बडा मुहसीन खुदा- माफ करदेगा वफा

गर खुसुअ से दो रकातें भी अदा हो जायेगी


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