Posted by: Bagewafa | جولائی 29, 2014

मोदी युग की पहली कविता —रणधीर्सींघ सुमन

मोदी युग की पहली कविता ———–

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कारगिल -कारगिल ————के अपराधियों से जोड़ा खाने वाले.
अपराधियों ने नौजवानों को मरवा दिया था
आज वहीअपराधी
शहीद – शहीद चिल्ला रहे है
यानी पहले शहीद कराओ
-फिर फूल चढाओ
फिर अपराधियों से हाथ मिलाओ
फिर ताबूत में कमीशन खाओ
फिर स्मारक बनवाओ
उसमे भी कमीशन खाओ
राष्ट्र प्रेम की अलख जगाओ
फिर चिल्लाओ कश्मीर मांगोगे
तो फिर सीना चीर देगे
संदेश भेजोगे कश्मीर सुंदर
आजाद मुल्क बनाओ
रक्षा क्षेत्र में एफ डी आई
अमरीका की गुलामी
गुजरात में
फट्टा के साथ
हवाला की सलामी
हिन्दू की एकता में
आरक्षण का विरोध
धर्म के नाम पर
धार्मिक गुलामी
सहारनपुर में सद्भाव
काठ में दंगा
लखनऊ में चेलो से
हुरदंगा
वोट के लिए सब चंगा
गाजा की ख़ुशी
यू. एन में दुखी
बर्लिन में
सेतुवा
जिनपिंग से
हलुवा
जरूरत है
तो बाप
नही है तो
देगे श्राप
यही इनका
राष्ट्र प्रेम
राष्ट्रप्रेमी है
बाकी सभी देश
द्रोही है
खुद का बाप
गाँधी नही
हिटलर है
संसद में
गाँधी
बाहर गोडसे की
आंधी
आजादी युद्ध में
अंग्रेज भक्त
आज बड़े
स्वतंत्रता सेनानी
कायरो की ज़मात
देश रक्षक
है यही
नोट -सभी संघी मित्रो से अनुरोध है कि कविता में कामा फुल स्टॉप सही करने का कष्ट करे
सादर
उन्ही का कापीराइट युक्त
सुमन
लो क सं घ र्ष !

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