Posted by: Bagewafa | اگست 18, 2014

हो गई है गजल….वसीम मलीक रांदेर,सुरत

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हो गई है गजल….वसीम मलीक रांदेर,सुरत

 

फिक्र अंगेज हो गई है गजल
कितनी जरखेज हो गई है गजल

काट देती है नफरतोंकी जडें
तेग से तेज हो गई है गजल

मिल गया जीसे दामने युसुफ
ऐसी नवखेज हो गई है गजल

मीर की याद आ गई थी आज
दर्द अंगेज हो गई है गजल

फलसफा ,फिक्र् गम निशात”वसीम”
सब में आमेज हो गई है गजल

(Courtesy:Facebook)

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