Posted by: Bagewafa | ستمبر 6, 2014

आँखों में रात ख्वाब का खंज़र उतर गया ….शीन काफ़ निज़ाम آنکھوں میں رات خواب کا خنجر اتر گیا …شین۔ قاف نظام

آنکھوں میں رات خواب کا خنجر اتر گیا …شین۔ قاف نظام

آنکھوں میں رات خواب کا خنجر اتر گیا
یعنی سحر سے پہلے چراغ سحر گیا
اس فکر میں ہی اپنی تو گزری تمام عمر
میں اسکی تھا پسند تو کیوں چھوڑ کے گیا
آنسو گرے تو میرے ہی دامن میں آئے تھے
آکاش کیسے اتنے ستاروں سے بھر گیا
کوئی دعا ہماری کبھی تو قبول کر
ورنہ کہیں گے لوگ دعا سے اثر گیا
پچھلے برس حویلی ہماری کھنڈر ہوئی
برسا جو اب کے ابر تو سمجھو کھنڈر گیا
میں پوچھتا ہوں تجھ کو ضرورت تھی کیا ‘نظام’
تو کیوں چراغ لے کے اندھیرے کے گھر گیا۔

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आँखों में रात ख्वाब का खंज़र उतर गया ….शीन काफ़ निज़ाम

आँखों में रात ख्वाब का खंज़र उतर गया
यानी सहर से पहले चिराग़े-सहर गया
इस फ़िक्र में ही अपनी तो गुजरी तमाम उम्र
मैं उसकी था पसंद तो क्यों छोड़ के गया
आँसू गिरे तो मेरे ही दामन में आए थे
आकाश कैसे इतने सितारों से भर गया
कोई दुआ हमारी कभी तो कुबूल कर
वर्ना कहेंगे लोग दुआ से असर गया
पिछले बरस हवेली हमारी खँडर हुई
बरसा जो अबके अब्र तो समझो खँडर गया
मैं पूछता हूँ तुझको ज़रूरत थी क्या ‘निजाम’
तू क्यूँ चिराग़ ले के अँधेरे के घर गया.

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زمرے

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